भारत ने यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए कूटनीतिक रूप से अपनी सक्रियता को और बढ़ा दिया है तथा इस दिशा में कीव और मॉस्को दोनों के साथ बातचीत की पुष्टि की गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से यह बात स्वीकार की है कि देश इस लंबे समय से चल रहे तनाव को हल करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।
यूक्रेन युद्ध के समाधान के लिए कूटनीति
विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि भारत केवल इस मामले में पक्ष समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यावहारिक मुद्दों पर सीधे तौर पर शामिल हो चुका है। चर्चा का मुख्य केंद्र काला सागर में जहाजों की सुरक्षा, अनाज का निर्यात और ऊर्जा आपूर्ति जैसी तात्कालिक चिंताएं हैं। दोनों पक्षों के साथ इन बिंदुओं पर बातचीत जारी है ताकि स्थिति को सामान्य बनाया जा सके।
रूस के साथ पारंपरिक और ऐतिहासिक संबंध
रूस के साथ अपने संबंधों का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और मजबूत रिश्ते रहे हैं, विशेषकर पिछली सदी के छठे दशक से। जब भी भारत की क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा पर संकट आया, तत्कालीन सोवियत संघ ने विभिन्न तरीकों से सहयोग किया। आज यह साझेदारी रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु क्षेत्रों के साथ-साथ व्यापार, निवेश तथा ऊर्जा के स्तर पर भी काफी विस्तृत हो चुकी है।
वैश्विक मामलों में मध्यम शक्तियों की भूमिका
बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य और भू-राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक संकटों से निपटने के लिए पारंपरिक महाशक्तियों के अलावा मध्यम शक्तियों को भी सक्रिय रूप से सहयोग करना चाहिए। आपूर्ति श्रृंखला, उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण, जलवायु परिवर्तन और संघर्ष समाधान जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि वैश्विक चुनौतियों का सामना प्रभावी ढंग से किया जा सके।

