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भारत और यूएई साझेदारी: रणनीतिक संबंधों की बढ़ती मजबूती

भारत और यूएई साझेदारी: रणनीतिक संबंधों की बढ़ती मजबूती

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया यूएई यात्रा ने भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के इस दौर में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच द्विपक्षीय साझेदारी के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया है। अबू धाबी में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों के मंत्रियों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के तहत हो रहे सहयोग की समीक्षा की।

व्यापार और आर्थिक सहयोग के नए आयाम

भारत और यूएई के बीच आर्थिक interdependence इस रिश्ते की मुख्य नींव है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि दर्ज की गई थी, जो अगले वित्त वर्ष में बढ़कर 101.25 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यूएई वर्तमान में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि भारत यूएई का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। दोनों सरकारों ने वर्ष 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) ने इस वाणिज्यिक संबंध को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुंच और सेवाओं में व्यापार को बढ़ावा मिला है।

ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक भंडार

ऊर्जा सुरक्षा भारत और यूएई के बीच घनिष्ठ संबंधों का सबसे मजबूत आधार स्तंभ है। भारत अपनी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए आयातित तेल और गैस पर निर्भर है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम बना रहता है। यूएई एक प्रमुख ऊर्जा उत्पादक होने के नाते भारत को अपने आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने में मदद करता है। दोनों देशों के बीच हुए समझौतों के तहत क्रूड ऑयल स्टोरेज और एलपीजी आपूर्ति के अवसरों को लेकर रणनीतिक सहयोग पर काम किया जा रहा है, जो आपातकालीन स्थिति में आपूर्ति में आने वाली बाधाओं से निपटने में मददगार साबित हो सकता है।

रक्षा और उन्नत तकनीक में बढ़ता सहयोग

रक्षा सहयोग अब केवल आवधिक सैन्य वार्ताओं तक सीमित न रहकर एक संरचित साझेदारी के रूप में विकसित हो रहा है। इसके तहत रक्षा औद्योगिक सहयोग, उन्नत तकनीक, सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही, भारत और यूएई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उन्नत कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों में भी मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों के तकनीकी और औद्योगिक विकास को नई गति मिल रही है।

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