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भारतीय नौसेना द्वारा गोवा में राफेल मरीन विमानों के परीक्षण शुरू

भारतीय नौसेना द्वारा गोवा में राफेल मरीन विमानों के परीक्षण शुरू

भारतीय नौसेना द्वारा गोवा स्थित नौसेना बेस पर राफेल मरीन लड़ाकू विमानों के परीक्षणों की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य विमान को आईएनएस विक्रांत पर संचालित करने के लिए आवश्यक संशोधनों और बदलावों की पुष्टि करना है। नौसेना की युद्धक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है।

आईएनएस विक्रांत के अनुकूल बनाने की प्रक्रिया

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह परीक्षण उन तकनीकी बदलावों पर पूरी तरह केंद्रित हैं जो विमान को स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस विक्रांत से सफलताપूर्वक संचालित करने के लिए जरूरी हैं। भारतीय नौसेना ने कुल छब्बीस राफेल मरीन विमानों का अनुबंध किया है, जिनकी डिलीवरी वर्ष 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत तक मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

स्टोबार प्रणाली और तकनीकी समन्वय

आईएनएस विक्रांत स्टोबार प्रणाली का इस्तेमाल करता है, जिसके तहत विमान स्की-जंप रैंप से उड़ान भरते हैं और उतरने के लिए अरेस्टर वायर की मदद ली जाती है। चूंकि राफेल एम को मूल रूप से कैटोबार कैरियर के लिए रूपरेखा तैयार किया गया था, इसलिए फ्रांसीसी विमान को विक्रांत के स्की-जंप और अन्य बुनियादी ढांचे के साथ संगत बनाना जरूरी है। यह परीक्षण स्वदेशी वाहक पोत पर विमान की उपयुक्तता साबित करने में सहायता करेंगे।

राफेल मरीन की मुख्य विशेषताएं

दासॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित राफेल मरीन एक ट्विन-इंजन मल्टीरोल फाइटर विमान है, जिसे फ्रांसीसी नौसेना के लिए विकसित किया गया है। यह विमान एयर डिफेंस, डीप स्ट्राइक, एंटी-शिप ऑपरेशन और रिकॉनेसेंस जैसे विभिन्न अभियानों को अंजाम देने में पूरी तरह सक्षम है। इसका अधिकतम टेक-ऑफ वजन चौबीस दशमलव पांच टन है और यह दो सैफ्रान एम88-ई4 टर्बोफैन इंजन से संचालित होता है। इसकी अधिकतम गति मैक 1.8 यानी करीब बाईस सौ किलोमीटर प्रति घंटा है। इसके अलावा, यह मेटिओर, मिका, स्कैल्प और एक्सोसेट जैसी घातक मिसाइलों को तैनात करने की क्षमता रखता है।

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