फिक्की के हालिया विनिर्माण सर्वे के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में देश के विनिर्माण सेंटिमेंट में सुधार दर्ज किया गया है। फैक्ट्रियों में उत्पादन और क्षमता उपयोग का स्तर बेहतर होने से यह सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। इस सर्वे में विभिन्न क्षेत्रों की कई कंपनियों को शामिल किया गया था।
उत्पादन और मांग में बढ़ोतरी
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, पिछली तिमाही की तुलना में इस अवधि के दौरान उत्पादन और नए ऑर्डर्स के स्तर में सुधार हुआ है। लगभग 95 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने पिछली तिमाही के मुकाबले उच्च या समान उत्पादन स्तर दर्ज किया, जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 77 प्रतिशत था। मांग के मोर्चे पर भी 90 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बेहतर या समान ऑर्डर मिलने की बात कही है।
क्षमता उपयोग और निवेश का रुझान
विनिर्माण इकाइयों का औसत क्षमता उपयोग बढ़कर लगभग 75 प्रतिशत पहुंच गया, जो कि पिछली तिमाही में 72 प्रतिशत दर्ज किया गया था। इसके अलावा, आगामी छह महीनों के लिए निवेश का दृष्टिकोण स्थिर बना हुआ है। हालांकि, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, टैरिफ, व्यापार प्रतिबंधों और बढ़ते लॉजिस्टिक खर्च जैसी कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
रोजगार और लागत से जुड़े पहलू
सर्वे में यह भी सामने आया कि आगामी तीन महीनों में लगभग 43 प्रतिशत कंपनियां अतिरिक्त कार्यबल नियुक्त करने पर विचार कर रही हैं। हालांकि, कच्चे माल की ऊंची लागत, ऊर्जा कीमतों और लॉजिस्टिक खर्च बढ़ने के कारण अधिकांश निर्माताओं ने उत्पादन लागत में वृद्धि दर्ज की है। बैंक ऋण पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने के बावजूद औसत ब्याज दर में मामूली बढ़ोतरी भी देखी गई है।

