Site icon Memoirs Publishing

जम्मू-कश्मीर में कृषि भूमि पर निर्माण की अनुमति देने वाले नए कानूनों पर महबूबा मुफ्ती ने जताई चिंता

जम्मू-कश्मीर में कृषि भूमि पर निर्माण की अनुमति देने वाले नए कानूनों पर महबूबा मुफ्ती ने जताई चिंता

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने हाल ही में लागू किए गए व्यावसायिक और कृषि भूमि से जुड़े नियमों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कृषि और बागवानी भूमि को व्यावसायिक निर्माण के लिए खोलने से भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

विकास के नाम पर भूमि और खाद्य सुरक्षा से खिलवाड़

महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि विकास के नाम पर राज्य के बगीचों और उपजाऊ कृषि भूमि पर कमर्शियल हाई-राइज़ इमारतें बनाई जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के फैसलों से खाद्य सुरक्षा और लोगों का जीवन खतरे में पड़ रहा है। उनका यह भी कहना था कि विशेषज्ञ लगातार भूकंपीय और अन्य प्राकृतिक खतरों की चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद लापरवाही बरती जा रही है।

विधानसभा सत्र में पारित हुए थे संशोधित नियम

ये संशोधित कानून, जिनके तहत अनुमति और अनापत्ति प्रमाण पत्रों (NOC) की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है, श्रीनगर में आयोजित हालिया विधानसभा सत्र के दौरान पारित किए गए थे। जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा यह विधेयक पटल पर रखा गया था, तब बहस के दौरान इसका बहुत कम विरोध देखने को मिला था। हालांकि, व्यापारिक समुदाय ने इन नए नियमों का स्वागत किया है, लेकिन पूर्व नौकरशाहों और अधिकारियों के एक नागरिक समाज समूह ने इसके कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।

विपक्ष और अन्य नेताओं की चिंताएं

पीडीपी नेता और पुलवामा से विधायक वहीद उर रहमान पारा ने भी सरकार के इन नए नियमों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि आवासीय क्षेत्रों के भीतर दुकानों और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देने से स्थानीय पर्यावरण और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने वर्ष 2014 की बाढ़ का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि इस तरह के निर्माण कार्यों से जल निकासी और बाढ़ सुरक्षा को लेकर जोखिम और अधिक बढ़ सकते हैं।

Exit mobile version