जम्मू-कश्मीर में 1 अक्टूबर 2006 के बाद जन्मे हजारों पात्र युवा पिछले दो वर्षों से ऑनलाइन मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने में असमर्थ हैं। चुनाव आयोग के डिजिटल ‘बीएलओ ऐप’ (BLO App) में इन युवाओं का डेटा स्वीकार न किए जाने के कारण यह तकनीकी समस्या बनी हुई है। अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं ने इस बात की पुष्टि की है कि ऐप की सीमाओं के कारण नए मतदाताओं का यह वर्ग डिजिटल रूप से खुद को पंजीकृत नहीं कर पा रहा है।
इस तकनीकी दिक्कत से निपटने के लिए चुनाव अधिकारी पात्र आवेदकों से जन्म प्रमाण पत्र और फॉर्म 6 जैसे भौतिक दस्तावेज जमा करने को कह रहे हैं, ताकि उनका मैनुअल यानी ऑफलाइन प्रसंस्करण किया जा सके। हालांकि, जब तक आधिकारिक अहर्ता तिथि (qualifying date) को अपडेट नहीं किया जाता, तब तक डिजिटल पंजीकरण की प्रक्रिया रुकी रहेगी। बूथ-लेवल अधिकारियों (BLOs) ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अक्टूबर 2024 से ही डिजिटल प्रणाली ने इस तिथि के बाद जन्मे नए मतदाताओं के पंजीकरण पर रोक लगा रखी है।
मैनुअल दस्तावेजों के सहारे प्रक्रिया
बीएलओ का कहना है कि उन्होंने कई नए मतदाताओं के 18 वर्ष की आयु पूरी करने और उनके दस्तावेज तैयार होने के बावजूद यह मुद्दा उच्च अधिकारियों के सामने उठाया है। ऐप में डेटा अपलोड करने का कोई विकल्प न होने के कारण वे ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं। हाल ही में शुरू किए गए विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान के दौरान भी चुनाव कर्मचारियों को यही बाधा आ रही है। ऐप में तकनीकी प्रतिबंध होने के कारण कर्मचारियों ने मतदाताओं से विवरण एकत्र करने को कहा है ताकि ऐप में अनुमति मिलते ही ऑनलाइन पंजीकरण पूरा किया जा सके।
अधिकारियों का पक्ष
जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) गुरपिंदर सिंह ने स्पष्ट किया है कि जब तक भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूचियों के नए संशोधन की घोषणा नहीं की जाती, तब तक मौजूदा ऑनलाइन पंजीकरण सीमाएं बनी रहेंगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूचियों का संशोधन किया गया था और उसके बाद ऐसा कोई संशोधन घोषित नहीं हुआ है। जैसे ही नया संशोधन होगा, नए मतदाताओं का ऑनलाइन पंजीकरण सुचारू रूप से शुरू कर दिया जाएगा।

