केरलम विधानसभा ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव में मतदाता सूची से बाहर किए गए पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकारों को फिर से बहाल करने की मांग भी उठाई गई है। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने इस घटनाक्रम को केरलम के इतिहास में एक बड़ा कदम करार दिया है।
प्रस्ताव की मुख्य बातें और मांगें
विधानसभा में पेश किए गए इस प्रस्ताव में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। प्रस्ताव के माध्यम से यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है कि किसी भी योग्य नागरिक को उसके मताधिकार से वंचित न किया जाए। इसके साथ ही, मुख्य चुनाव आयुक्त की चयन समिति की संरचना में बदलाव का सुझाव देते हुए इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और देश के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने की मांग की गई है ताकि प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता आ सके।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विरोध
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव को माकपा के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के विधायकों का पूरा समर्थन प्राप्त हुआ। हालांकि, सदन में मौजूद भाजपा के तीन विधायकों ने इस कदम का पुरजोर विरोध किया। भाजपा विधायक दल के नेता बीबी गोपकुमार ने मुख्यमंत्री की वैधता पर सवाल उठाते हुए राज्य विधानसभा को भंग करने का संशोधन सुझाव भी दिया। प्रस्ताव पारित होने के बाद बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए भाजपा समर्थकों ने इसकी प्रतियां भी जलाईं।
भाजपा नेतृत्व के आरोप
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे एक दिखावा बताया। उन्होंने आपत्ति जताई कि यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब यह मामला देश के सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। चंद्रशेखर ने कांग्रेस और वाम दलों पर मिलकर काम करने का आरोप लगाया और राज्य के पूर्व मुख्य चुनाव अधिकारी की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए।

