मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित प्रसिद्ध जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की बिना सिर वाली प्राचीन मूर्ति का लापता सिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को मिल गया है। 11वीं सदी की इस सात फीट ऊंची प्रतिमा का सिर मिलने से इसे दोबारा धड़ से जोड़ने की उम्मीद जग गई है, जिससे श्रद्धालुओं की पुरानी पीड़ा दूर हो सकती है।
संग्रहालय के भंडार में मिला सिर
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक डॉ. यदुबीर सिंह रावत के अनुसार, विभाग के संग्रहालय भंडार में यह लापता सिर सुरक्षित मिला है। यह संग्रहालय 1910 में ब्रिटिश अधिकारी डब्ल्यू. ए. जार्डिन द्वारा स्थापित किया गया था, जिसे बाद में 1952 में ASI के नियंत्रण में लाया गया था। अधिकारियों का मानना है कि यह सिर संभवतः 1910 में संग्रहालय की स्थापना के समय से ही वहां मौजूद था, जिसके बारे में लंबे समय तक किसी को पुख्ता जानकारी नहीं थी। विशेषज्ञों की टीम अब इस सिर की तकनीकी जांच कर रही है और सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे प्रतिमा के धड़ से जोड़ा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला
खजुराहो के जावरी मंदिर की इस बिना सिर वाली विष्णु प्रतिमा को लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चाएं सामने आ चुकी हैं। पिछले साल इस मूर्ति के पुनरुद्धार और पुनर्निर्माण की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें दावा किया गया था कि सदियों पहले आक्रमणों के दौरान प्रतिमा को नुकसान पहुंचा था। हालांकि, उस दौरान अदालत ने याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद इस मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
ऐतिहासिक महत्व का है जावरी मंदिर
खजुराहो के पूर्वी मंदिर समूह में स्थित जावरी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इसका निर्माण चंदेल शासकों के शासनकाल में 11वीं सदी के उत्तरार्ध में किया गया था। अपनी अनूठी स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह मंदिर खजुराहो के विश्व धरोहर स्मारकों के समूह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अब इस प्राचीन प्रतिमा का सिर मिल जाने से मंदिर और मूर्ति के मूल स्वरूप को बहाल करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया जा रहा है।

