संघ लोक सेवा आयोग की कठिन परीक्षा में लगातार चार बार असफलता मिलने के बाद भी हार न मानने वाली कोमल मीणा ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर आईपीएस अधिकारी बनने का मुकाम हासिल किया है। राजस्थान के करौली जिले की रहने वाली कोमल मीणा की यह सफलता उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल है जो विपरीत परिस्थितियों में अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं। उनकी इस सफलता के पीछे उनकी मां का अटूट विश्वास और सही समय पर मिला मार्गदर्शन सबसे बड़ी ताकत बना।
शुरुआती शिक्षा और सिविल सेवा का सफर
कोमल मीणा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई राजस्थान से ही पूरी की। बारहवीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वर्ष 2019 में जियोलॉजी विषय में अपनी स्नातक की डिग्री प्राप्त की। डिग्री पूरी होते ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का निर्णय लिया और अपनी इस लंबी यात्रा की शुरुआत की। हालांकि, देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली इस परीक्षा का रास्ता उनके लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था और शुरुआती दौर में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
लगातार चार बार असफलता का सामना
वर्ष 2019 में स्नातक पूरा करने के बाद जब उन्होंने तैयारी शुरू की, तो शुरुआती चरणों में उन्हें लगातार चार बार असफलता का मुंह देखना पड़ा। बार-बार मिल रही असफलताओं के कारण उनका आत्मविश्वास पूरी तरह से टूट चुका था और स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि उनका मन पढ़ाई से पूरी तरह उचट गया था। निराशा के उस दौर में उन्हें यह महसूस होने लगा था कि शायद उन्हें सिविल सेवा का विचार छोड़कर किसी अन्य दिशा में अपने करियर का प्रयास करना चाहिए।
मां की प्रेरणा से बदली तकदीर
जब कोमल मीणा पूरी तरह हताश हो चुकी थीं और परीक्षा छोड़ने का मन बना रही थीं, तब उनकी मां ने एक मजबूत ढाल की तरह उनका साथ दिया। उनकी मां ने उन्हें हमेशा यह विश्वास दिलाया कि वह केवल सिविल सेवा के लिए ही बनी हैं और उन्हें बीच में मैदान छोड़कर नहीं भागना चाहिए। मां के इन्हीं शब्दों और लगातार प्रोत्साहन ने उनमें एक नई ऊर्जा का संचार किया, जिसके बाद उन्होंने दोगुने जोश के साथ दोबारा अपनी पढ़ाई शुरू की।
सफलता और वर्तमान प्रशासनिक जिम्मेदारी
मां के प्रेरणादायी शब्दों और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर कोमल मीणा ने वर्ष 2022 की सिविल सेवा परीक्षा में 765वीं रैंक हासिल की। इसके बाद वह वर्ष 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी बनीं। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने एसडीपीओ के रूप में जिम्मेदारी संभाली और वर्तमान में वह पटना ग्रामीण में एसपी के पद पर कार्यरत हैं। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा साबित करती है कि बुलंद हौसलों के आगे बड़ी से बड़ी बाधाएं भी छोटी पड़ जाती हैं।

