लद्दाख प्रशासन ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा दिए गए उस बयान को पूरी तरह से झूठा और काल्पनिक करार दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस ठंडे रेगिस्तान क्षेत्र के हर कोने में शराब की दुकानें खोली जा रही हैं। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नए आबकारी नियमों को पहले ही वापस ले लिया गया था और वर्तमान में पूरे क्षेत्र में केवल एक ही शराब की दुकान चालू हालत में है।
आबकारी नीति और दुकानों की स्थिति पर प्रशासन का स्पष्टीकरण
प्रशासन के अनुसार, इस वर्ष 1 जून को नई आबकारी नीति 2026-27 अधिसूचित की गई थी, जिसे जनता और सामाजिक संगठनों से मिले सुझावों के आधार पर 26 अगस्त को वापस ले लिया गया। इसके साथ ही नई शराब की दुकानें खोलने के लिए जारी किए गए नीलामी नोटिस को भी रद्द कर दिया गया था और पुरानी नीति को बहाल कर दिया गया।
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, पुरानी आबकारी नीति के तहत लेह में केवल दो शराब की दुकानें अनुमत थीं। इनमें से वार्ड नंबर 6 में 14 अक्टूबर को एक शराब की दुकान शुरू हुई, जबकि वार्ड नंबर 4 के लिए कोई बोली नहीं मिलने के कारण वहां कोई दुकान नहीं खुली।
अन्य लाइसेंस और बार की स्थिति
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में पूरे लद्दाख में केवल एक ही शराब की दुकान चल रही है। इसके अलावा, क्षेत्र में कुछ स्थानों पर रेस्टोरेंट और होटलों में तय नियमों और दूरी के मानदंडों का पालन करते हुए लाइसेंस के आधार पर बार संचालित हो रहे हैं।
अधिकारियों ने सोनम वांगचुक को सलाह दी है कि वे राष्ट्रीय मीडिया और आम जनता के सामने कोई भी दावा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से तथ्यों की सही जांच अवश्य कर लें। दूसरी ओर, कार्यकर्ता का कहना है कि प्रशासन केवल अपनी नाकामी छिपाने के लिए इस तरह के स्पष्टीकरण दे रहा है।

