Site icon Memoirs Publishing

मद्रास हाईकोर्ट का अहम फैसला: पिता के ब्रिटिश नागरिक बनने से नहीं छिन सकती नाबालिग बेटे की भारतीय नागरिकता

मद्रास हाईकोर्ट का अहम फैसला: पिता के ब्रिटिश नागरिक बनने से नहीं छिन सकती नाबालिग बेटे की भारतीय नागरिकता

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि केवल पिता के विदेशी नागरिकता हासिल करने भर से किसी नाबालिग बच्चे की भारतीय नागरिकता अपने आप समाप्त नहीं हो जाती है। अदालत ने नागरिकता अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के बीच स्पष्ट अंतर बताते हुए यह फैसला सुनाया है।

अदालत का फैसला और पृष्ठभूमि

न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति ने एन एस गुरुदेव नागैया शणमुगम द्वारा अपने 10 वर्षीय बेटे के भारतीय पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए दायर याचिका पर यह निर्देश जारी किया। याचिका के अनुसार, बच्चे का जन्म सलेम में हुआ था और उस समय उसके दोनों माता-पिता भारतीय नागरिक थे। बच्चे को लंदन में भारतीय पासपोर्ट जारी किया गया था। बाद में पिता ने ब्रिटिश नागरिकता ले ली, जबकि मां अभी भी भारतीय नागरिक हैं। जब पासपोर्ट नवीनीकरण के आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो अदालत का दरवाजा खटखटाया गया।

नागरिकता अधिनियम के प्रावधानों की समीक्षा

सुनवाई के दौरान, प्राधिकारियों की ओर से नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 8(2) का हवाला दिया गया। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि यह मामला अधिनियम की धारा 9 से संबंधित है, जो स्वैच्छिक रूप से विदेशी नागरिकता प्राप्त करने पर नागरिकता समाप्ति से जुड़ी है, न कि धारा 8 के तहत औपचारिक त्याग से। अदालत ने धाराओं की जांच के बाद पाया कि बच्चे ने जन्म से भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी, क्योंकि उसके जन्म के समय माता-पिता भारतीय नागरिक थे।

पासपोर्ट नवीनीकरण पर निर्देश

अदालत ने यह भी कहा कि पिता के विदेशी नागरिकता प्राप्त करने के कारण नाबालिग बच्चे की नागरिकता स्वतः समाप्त होने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। इसके बाद, अदालत ने मदुरै के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को निर्देश दिया कि वे बच्चे के पासपोर्ट नवीनीकरण के आवेदन पर विचार करें और आदेश प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर इस पर उचित निर्णय लें।

Exit mobile version