पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में वकीलों के एक समूह पर हुए हमले के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और वकीलों के संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सालबोनी पुलिस स्टेशन के पास हुआ हमला
हाल ही में पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के नवनिर्वाचित सदस्य शकील अहमद समेत कई वकील एक वाहन से जा रहे थे, तभी सालबोनी पुलिस स्टेशन के पास लाठी-डंडों से लैस लोगों ने उनकी गाड़ी पर हमला कर दिया और वाहन में तोड़फोड़ की। इस घटना के बाद वकीलों की सुरक्षा और राज्य में विधि के शासन को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इससे पहले भी कोलकाता के बैंकशाल कोर्ट और बरुईपुर कोर्ट परिसर के आसपास वकीलों पर हमलों की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
ममता बनर्जी और वाम दलों की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस घटना की तीखी निंदा की है। उनका कहना है कि वकीलों को बिना किसी डर और अपनी राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह के हमलों के पीछे विरोधी दल के लोग शामिल हैं और प्रशासन को इस मामले में निष्पक्ष व सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
दूसरी ओर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) और ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस (AILAJ) ने भी इस घटना पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। वाम नेताओं ने आरोप लगाया है कि राज्य में वकीलों को निशाना बनाया जा रहा है, जो लोकतंत्र और संविधान के लिए गंभीर खतरा है। संगठनों ने वकीलों की सुरक्षा के लिए तुरंत एक कड़ा कानून बनाने की भी पुरजोर मांग की है।

