मेघालय की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहाँ यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) के तीन विधायकों ने सत्ताधारी नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) का दामन थाम लिया है। विधानसभा अध्यक्ष थॉमस ए. संगमा ने इन तीनों विधायकों के एनपीपी में हुए विलय को आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अब सदन में यूडीपी के पास केवल एक ही विधायक शेष बचा है।
संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मिली मंजूरी
विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा विलय भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 4 के प्रावधानों के तहत मंजूर किया गया है। अध्यक्ष ने यह भी निर्देश जारी किए हैं कि इन तीनों विधायकों को अब मेघालय विधानसभा के भीतर एनपीपी के सदस्यों के रूप में ही बैठने के लिए सीटें आवंटित की जाएं।
विधायकों ने खुद की थी फैसले की पुष्टि
इन तीनों विधायकों ने पिछले महीने 17 अक्टूबर को विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपा था। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने जानकारी दी थी कि वे अपनी पार्टी का विलय एनपीपी में कर रहे हैं और वे सदन में यूडीपी विधायक दल का कम से कम दो-तिहाई हिस्सा हैं, जो इस प्रकार के फैसले के लिए जरूरी होता है। इसके बाद अध्यक्ष ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने फैसले की पुष्टि करने को कहा था। तय प्रक्रिया के तहत वे 19 अक्टूबर को अध्यक्ष के सामने पेश हुए, जहां उन्होंने अपने पत्र की सामग्री की पुष्टि करते हुए पार्टी बदलने के अपने निर्णय को दोहराया।
सदन में बदल रहा राजनीतिक समीकरण
हालिया समय में राज्य के राजनीतिक गलियारों में कई बड़े फेरबदल देखने को मिले हैं। यूडीपी के अन्य विधायकों के भाजपा में जाने की खबरों के बीच इन तीन विधायकों के सत्ताधारी एनपीपी में शामिल होने से विधानसभा के अंदर दलों की संख्या और समीकरणों में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जिससे राज्य की राजनीति में सुगबुगाहट तेज हो गई है।

