केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश में नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की है। इस योजना के तहत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 60 हजार नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों का एक विस्तृत नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिन्हें भारतीय सेना के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस स्वतंत्रता दिवस भाषण के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने आधुनिक प्रणालियों और तकनीकों से लैस एक जीवंत नागरिक सुरक्षा नेटवर्क स्थापित करने की बात कही थी। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड महानिदेशालय द्वारा इस पायलट प्रोजेक्ट को क्रियान्वित किया जा रहा है।
विशेष प्रशिक्षण और मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका
इस परियोजना के पहले चरण में भाग लेने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नागरिक सुरक्षा मास्टर प्रशिक्षकों को तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक भाग लेने वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से 50-50 प्रशिक्षकों का चयन किया गया है, जिसके तहत कुल 600 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भारतीय सेना के निर्धारित प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों में नवंबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक पूरा किया जाना है।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रत्येक मास्टर ट्रेनर अपने संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में 100 नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करेगा। इस प्रकार कुल मिलाकर 60,000 स्वयंसेवकों को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे आपातकालीन स्थितियों से निपटने की क्षमता में बड़ा विस्तार होगा।
इन राज्यों और क्षेत्रों को किया गया है शामिल
इस पायलट प्रोजेक्ट में देश के कुल 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। इनमें:
- जम्मू और कश्मीर
- पंजाब
- राजस्थान
- गुजरात
- दिल्ली
- मेघालय
- सिक्किम
- असम
- उत्तर प्रदेश
- केरल
- कर्नाटक
- तमिलनाडु
प्रशिक्षण के मुख्य क्षेत्र
नागरिक सुरक्षा कर्मियों को समकालीन सुरक्षा खतरों, शत्रुतापूर्ण स्थितियों और विभिन्न आपातकालों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा। इसके लिए उन्हें मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिसमें खतरे की जागरूकता, सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया, तथा संचार और समन्वय शामिल है। इस व्यापक नेटवर्क से देश के विभिन्न हिस्सों में आपातकाल के समय त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

