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छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में जंगली बंदरों का आतंक, स्थानीय लोग परेशान

छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में जंगली बंदरों का आतंक, स्थानीय लोग परेशान

छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में जंगली बंदरों का बढ़ता आतंक स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। जंगलों से निकलकर ये बंदर लगातार रिहायशी बस्तियों में दाखिल हो रहे हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

गेलहापानी क्षेत्र में बढ़ी परेशानी

चिरमिरी नगरपालिका के वार्ड 9 के अंतर्गत आने वाले गेलहापानी इलाके में बंदरों का यह प्रकोप सबसे अधिक गंभीर रूप ले चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां रोजाना 100 से 150 बंदरों के झुंड बस्तियों में आ जाते हैं। ये झुंड सीधे घरों और दुकानों के भीतर प्रवेश कर रहे हैं, जिससे रोजमर्रा का कामकाज प्रभावित हो रहा है।

घरों और दुकानों को हो रहा नुकसान

बंदर रसोई में रखे पके हुए भोजन को ले जाते हैं और खुला दरवाजा मिलने पर घरों का सामान बिखेर देते हैं। दुकानदारों का कहना है कि उन्हें अपनी दुकानों की सुरक्षा के लिए हाथों में डंडे रखकर पहरा देना पड़ता है। बंदर दुकानों की छतों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ खाने-पीने का सामान भी उठा ले जाते हैं, जिससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताएं

क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि बंदरों के काटने और हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। सड़क पर चलने वाले बच्चों को डराकर उनका सामान छीनने की घटनाएं भी बढ़ी हैं, जिसके चलते माता-पिता बच्चों को अकेले बाजार भेजने से कतराने लगे हैं। महिलाओं का अकेले घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।

प्रशासनिक कार्रवाई की मांग

स्थानीय निवासियों ने इस समस्या को लेकर वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को कई बार लिखित शिकायतें सौंपी हैं। लोगों ने मांग की है कि बंदरों को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित पकड़ा जाए और किसी दूरवर्ती जंगल में छोड़ा जाए। वहीं, वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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