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मुंबई में क्या लौट रहा है अंडरवर्ल्ड का साया? उत्तर भारतीय गिरोहों की बढ़ती सक्रियता

मुंबई में क्या लौट रहा है अंडरवर्ल्ड का साया? उत्तर भारतीय गिरोहों की बढ़ती सक्रियता

मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में एक बार फिर अंडरवर्ल्ड के बढ़ते दखल और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हाल ही में हुई गोलीबारी की घटना ने उस पुराने दौर की यादें ताजा कर दी हैं, जब हिंदी सिनेमा जगत अपराधियों के साए में जीने को मजबूर था। जानकारों का मानना है कि पुराने स्थानीय गिरोहों के खात्मे के बाद अब उत्तर भारत के आपराधिक सिंडिकेट इस खालीपन को भरने की कोशिश कर रहे हैं।

नब्बे के दशक का खौफनाक दौर

नब्बे के दशक के आखिर और दो हजार के दशक की शुरुआत का समय फिल्म जगत के लिए बेहद तनावपूर्ण रहा था। उस दौरान रंगदारी और निजी रंजिश के चलते कई बड़े फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को निशाना बनाया गया था। मुकेश दुग्गल की हत्या, गुलशन कुमार पर हमला और राकेश रोशन पर जानलेवा हमले जैसी कई घटनाएं उस खौफनाक दौर का हिस्सा थीं। इंडस्ट्री में बढ़ते दबाव के बाद फिल्म हस्तियों ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर सुरक्षा की गुहार लगाई थी।

पुलिस की सख्ती और गिरोहों का खात्मे का दौर

उस समय के गंभीर हालातों से निपटने के लिए मुंबई पुलिस ने कड़े कदम उठाए थे। एन्काउंटर नीति और सख्त कानूनों के जरिए पुलिस ने सक्रिय गिरोहों की कमर तोड़ दी थी। मुख्य सरगना या तो जेल की सलाखों के पीछे भेज दिए गए या फिर पुलिस कार्रवाई में मारे गए। इस सख्त रुख के चलते लगभग दो दशकों तक मुंबई में जबरन वसूली और अंडरवर्ल्ड की गतिविधियों पर काफी हद तक लगाम लगी रही और फिल्म जगत ने चैन की सांस ली थी।

बदले हुए चेहरे और नए समीकरण

पिछले कुछ समय से परिस्थितियों में दोबारा बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तर भारत में सक्रिय संगठनों और नए गिरोहों ने फिल्म कलाकारों तथा मशहूर हस्तियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। सलमान खान के घर पर हुई गोलीबारी, बाबा सिद्दीकी की हत्या और हाल ही में टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर हुआ हमला इस बात का संकेत है कि अपराधियों के चेहरे बदल चुके हैं, लेकिन उनका तरीका वही पुराना आतंक फैलाने वाला है। ताजा घटनाओं ने एक बार फिर फिल्म जगत की सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है।

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