ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस द्वारा जारी किए गए उस नोटिस के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें उनसे शांति बनाए रखने के लिए एक बॉन्ड निष्पादित करने को कहा गया था। यह मामला हाल ही में चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा हुआ है।
पुलिस नोटिस और कानूनी प्रावधान
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 के तहत 17 अक्टूबर को जारी किए गए इस नोटिस में छात्र नेता को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के समक्ष पेश होने और यह कारण बताने के लिए कहा गया था कि उन्हें जांच की अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के वास्ते 10,000 रुपये का व्यक्तिगत मुचलका और एक जमानत क्यों नहीं देनी चाहिए। यह धारा मजिस्ट्रेट को किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड निष्पादित करने की मांग करने का अधिकार देती है यदि ऐसी विश्वसनीय सूचना हो कि वह व्यक्ति शांति भंग कर सकता है।
याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदु
अपनी याचिका में नेहा बोरा ने तर्क दिया है कि पुलिस का यह नोटिस तथ्यात्मक रूप से गलत है और इसमें शांति भंग होने की संभावना को साबित करने के लिए कोई ठोस सामग्री या जानकारी मौजूद नहीं है। याचिका के अनुसार, इस नोटिस में उस अवधि या घटना का भी जिक्र नहीं है जिसके संबंध में अशांति की आशंका जताई जा रही है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि यह पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण असहमति की आवाज को दबाने के लिए निवारक शक्तियों का दुरुपयोग है, जो संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(b) और 21 का उल्लंघन करती है। गौरतलब है कि नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को एक मार्च में शामिल होने के रास्ते में निवारक हिरासत में लिया गया था और अगले दिन उन्हें रिहा कर दिया गया था।

