नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को विभिन्न पर्यावरणीय मानकों के तहत माइक्रोप्लास्टिक की सैंपलिंग और उनकी पहचान करने की एक समान पद्धति विकसित करने पर प्रगति रिपोर्ट सौंपने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है। ट्रिब्यूनल ने यह निर्देश मीडिया रिपोर्टों और विभिन्न मामलों के आधार पर शुरू की गई कार्यवाही की सुनवाई के दौरान दिए हैं।
एनजीटी की पीठ का निर्देश
एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने सुनवाई के दौरान सीपीसीबी के उस अनुरोध को स्वीकार कर लिया, जिसमें प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने के वास्ते अतिरिक्त समय की मांग की गई थी। इस मामले की अगली सुनवाई अब चार फरवरी, 2027 को निर्धारित की गई है।
सीपीसीबी की रिपोर्ट और अनुसंधान कार्य
सीपीसीबी ने अपनी पूर्व रिपोर्ट में एनजीटी को जानकारी दी थी कि सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी ने मीठे पानी और मिट्टी में माइक्रोप्लास्टिक के नमूने एकत्र करने, उन्हें तैयार करने और उनके विश्लेषण की एक उचित पद्धति विकसित करने की सहमति प्रदान कर दी है।
किन विषयों पर शुरू हुई थी कार्रवाई
यह पूरी कार्यवाही भारतीय नमक और ब्रांडेड चीनी में सूक्ष्म प्लास्टिक की मौजूदगी तथा मानव रक्त में इसके पाए जाने से जुड़ी विभिन्न खबरों के बाद शुरू की गई थी। पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिहाज से माइक्रोप्लास्टिक की जांच और उसकी सटीक पहचान बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिस पर अब एनजीटी लगातार नजर बनाए हुए है और संबंधित निकायों से प्रगति की जानकारी मांगी जा रही है।

