भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देश भर में बनने वाले बड़े पुलों और महत्वपूर्ण संरचनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रूफ चेकिंग व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत हाईवे प्रोजेक्ट्स के डिजाइन और ड्राइंग की स्वतंत्र जांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) तथा अन्य प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों से कराई जाएगी।
आईआईटी और विशेषज्ञ संस्थान करेंगे स्वतंत्र जांच
एनएचएआई का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राजमार्गों पर बनने वाली बड़ी संरचनाएं लंबी अवधि तक सुरक्षित और टिकाऊ बनी रहें। इसके लिए डिजाइन, हाइड्रोलॉजिकल और हाइड्रोलिक स्टडी की स्वतंत्र प्रूफ चेकिंग अनिवार्य की गई है, जिससे इंडियन रोड कांग्रेस कोड और अनुबंध की सभी शर्तों का पूरी तरह पालन हो सके। प्राधिकरण द्वारा सूचीबद्ध किए जाने वाले संस्थानों की पूरी सूची आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें से ठेकेदार फर्मों को चयन करना होगा।
सभी प्रमुख प्रोजेक्ट मोड्स पर लागू होगी प्रक्रिया
यह नया प्रावधान ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन), बीओटी (बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर) और हाइब्रिड एन्युटी मोड सहित सभी प्रकार की परियोजनाओं पर लागू होगा। प्रक्रिया के तहत ठेकेदार एक डिजाइन डायरेक्टर नियुक्त करेंगे जो निविदा की शर्तों के अनुसार डिजाइन और ड्राइंग तैयार करेंगे। इसके बाद ऑथॉरिटी इंजीनियर या इंडिपेंडेंट इंजीनियर इसकी समीक्षा करेंगे। स्वीकृत डिजाइन के साथ ठेकेदार को सूचीबद्ध संस्थानों में से तीन विकल्प देने होंगे, जिनमें से क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा एक या दो संस्थानों का चयन किया जाएगा।
एक दिसंबर 2026 से होगी प्रभावी
यह संशोधित व्यवस्था 1 दिसंबर 2026 से सभी नई परियोजनाओं पर पूरी तरह से प्रभावी हो जाएगी। इसके अलावा, जिन परियोजनाओं के टेंडर पहले ही हो चुके हैं लेकिन उनके डिजाइन और ड्राइंग अभी तक प्रस्तुत नहीं किए गए हैं, उन पर भी यह नियम लागू होगा। विशेषज्ञ संस्थान द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी दस्तावेजों और डाटा के आधार पर स्वतंत्र जांच करेंगे और उनके निर्देशों का पालन सुनिश्चित होने के बाद ही डिजाइन को अंतिम स्वीकृति मिलेगी।

