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ऑरियनॉड उल्का बौछार अपने चरम पर, हैली धूमकेतु के अवशेष देखने का शानदार मौका

ऑरियनॉड उल्का बौछार अपने चरम पर, हैली धूमकेतु के अवशेष देखने का शानदार मौका

खगोल प्रेमियों के लिए इस सप्ताह आसमान में एक अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है क्योंकि वार्षिक ऑरियनॉड उल्का बौछार अपने चरम पर पहुंच गई है। यह खगोलीय घटना प्रसिद्ध हैली धूमकेतु के अवशेषों को टूटते हुए तारों के रूप में देखने का शानदार मौका प्रदान करती है।

क्या है ऑरियनॉड उल्का बौछार?

यह अद्भुत नजारा हर साल अक्टूबर के महीने में तब दिखाई देता है, जब पृथ्वी अंतरिक्ष में हैली धूमकेतु द्वारा छोड़े गए धूल और मलबे के एक विशाल मार्ग से गुजरती है। जब ये छोटे कण तेज गति से वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो वे आग की चमक के साथ जल जाते हैं, जिन्हें हम टूटते हुए तारे कहते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, ऑरियनॉड उल्काएं साल की सबसे तेज और चमकीली उल्काओं में गिनी जाती हैं, जो लगभग 66 से 70 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से यात्रा करती हैं। अमेरिकी मौसम सोसाइटी के अनुसार, यह बौछार 2 अक्टूबर से 7 नवंबर तक सक्रिय रहने की उम्मीद है, जबकि इसका मुख्य चरम 21 और 22 अक्टूबर के दौरान है।

भारत में देखने का समय और संख्या

रिपोर्टों के अनुसार, चरम अवधि के दौरान लगभग एक घंटे में 10 से 20 टूटते हुए तारे देखे जा सकते हैं। इनमें से कुछ बड़े टुकड़े बहुत चमकीले और लंबे समय तक रहने वाले फायरबॉल भी बना सकते हैं। भारतीय आसमान में इसे देखने का सबसे अच्छा समय रात 2 बजे से सुबह 5 बजे के बीच माना जा रहा है, क्योंकि शाम के समय तेज चंद्रमा की रोशनी की वजह से शुरुआती दौर में धुंधली धारियों को देखना थोड़ा कठिन हो सकता है।

देखने के लिए कुछ जरूरी बातें

इस खगोलीय नजारे का आनंद लेने के लिए किसी भी टेलीस्कोप या विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है। इसके लिए बस शहर की तेज रोशनी से दूर किसी अंधेरे स्थान पर जाना बेहतर होता है। दर्शकों को अपने आंखों को अंधेरे के अनुकूल ढलने के लिए लगभग 20 मिनट तक इंतजार करना चाहिए।

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