प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली में एक निजी समाचार चैनल के कार्यक्रम के दौरान वैश्विक व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और दुनिया में भारत की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज दुनिया बदल रही है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इसके साथ कदम मिलाने में संघर्ष कर रही हैं।
बदलती वैश्विक व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद दुनिया को सम्मान, सहयोग और विवादों के समाधान का पाठ मिला था, जिसके आधार पर संयुक्त राष्ट्र की नींव रखी गई थी। हालांकि, आज की चुनौतियां पूरी तरह बदल चुकी हैं और वैश्विक समस्याएं बदलने के बावजूद समाधान के तरीकों में बदलाव न आने के कारण व्यवस्था में दूरियां दिख रही हैं। व्यापार, तकनीक और समुद्री मार्गों को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
विपक्ष और ‘अव्यवस्था का सपना’
समारोह के दौरान विपक्ष पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक तरफ जहां दुनिया नई व्यवस्था की तलाश में जुटी है, वहीं देश में कुछ लोग अव्यवस्था का सपना देख रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सत्ता गंवाने के बाद वह व्यवस्था को ही नष्ट करने पर उतारू हो गई है।
चाणक्य के ‘मत्स्य न्याय’ का जिक्र
प्राचीन भारतीय अर्थशास्त्री चाणक्य के संस्कृत मंत्र ‘अप्रणीतः तु मत्स्यन्यायमुद्भावयति’ का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने समझाया कि जब कानून या दंड देने की व्यवस्था लागू नहीं होती, तो मत्स्य न्याय पैदा होता है यानी बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है। उन्होंने कहा कि दुनिया को आज ऐसी स्थिति से बचने के लिए एक मजबूत व्यवस्था की जरूरत है, और भारत वैश्विक स्तर पर इसी भूमिका को निभा रहा है। महामारी के दौरान कई देशों को दवाइयां और मुफ्त वैक्सीन पहुंचाकर देश ने अपनी वैश्विक प्रतिबद्धता निभाई है।
विकसित भारत 2047 और ग्लोबल साउथ
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बदलती दुनिया में ग्लोबल साउथ की आवाज को मुख्यधारा में लाना बहुत आवश्यक है। वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह सपना केवल देश के लिए नहीं बल्कि एक बेहतर दुनिया के लिए भी एक गारंटी है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग केवल अच्छे समय के लिए नहीं बल्कि संकट के समय भी प्रभावी होना चाहिए।

