केंद्र सरकार ने देश में चुनिंदा दवाओं के विज्ञापनों से जुड़े नियमों में बदलाव करने का बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत शेड्यूल एच, एच1 और एक्स में शामिल औषधियों के विज्ञापनों के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य भ्रामक औषधीय विज्ञापनों पर रोक लगाना है ताकि जनता को गलत जानकारी से बचाया जा सके।
किन दवाओं के लिए लागू होंगे नए नियम
प्रस्तावित बदलावों के दायरे में ऐसी प्रिस्क्रिप्शन दवाएं आती हैं, जिन्हें केवल डॉक्टर की सलाह और पर्ची के आधार पर ही उपयोग किया जाता है। इन विशेष औषधियों के दुरुपयोग या इनकी लत लगने की गंभीर संभावना को ध्यान में रखते हुए यह नियम प्रस्तावित किया गया है। इन दवाओं के विज्ञापनों पर कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
नया उप-नियम जोड़ने का प्रस्ताव
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी की गई मसौदा अधिसूचना के अनुसार, औषधि नियम, 1945 के नियम 65 में एक नया उप-नियम जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया है। ये नए नियम प्रस्तावित औषधि (संशोधन) नियम, 2026 के रूप में जाने जाएंगे और राजपत्र में अंतिम रूप से प्रकाशित होने की तारीख से लागू हो जाएंगे। यह पूरा मसौदा देश के औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत तैयार किया गया है।
सलाहकार बोर्ड की सिफारिश और जनता की भागीदारी
इस पूरी प्रक्रिया से पहले औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड ने भी शेड्यूल एच, एच1 और एक्स की श्रेणियों की दवाओं के विज्ञापनों के वास्ते केंद्र की पूर्व अनुमति का प्रावधान करने की स्पष्ट सिफारिश की थी। बोर्ड के सुझावों को ध्यान में रखते हुए ही इस मसौदे को आगे बढ़ाया गया है।
आम जनता और संबंधित पक्षों से मांगे गए सुझाव
सरकार ने इस मसौदे पर पारदर्शिता बनाए रखते हुए आम नागरिकों और सभी संबंधित पक्षों से अपनी आपत्तियां व सुझाव भेजने का आह्वान किया है। राजपत्र में इस अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि से 30 दिनों के भीतर इन सुझावों और आपत्तियों को प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है ताकि अंतिम नियमों को जनता के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा सके।

