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INS विक्रांत पर राफेल मरीन ने की सफल लैंडिंग, नौसेना की ताकत में होगा इजाफा

INS विक्रांत पर राफेल मरीन ने की सफल लैंडिंग, नौसेना की ताकत में होगा इजाफा

भारतीय नौसेना के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत पर फ्रांसीसी लड़ाकू विमान राफेल मरीन ने पहली बार सफलतापूर्वक लैंडिंग की है। अपने पहले ही प्रयास में पूरी तरह सटीक रही यह लैंडिंग भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा पड़ाव मानी जा रही है। इस परीक्षण से विमान को नौसेना के विमानवाहक पोत ऑपरेशंस के साथ एकीकृत करने में मदद मिलेगी।

गोवा में चल रहे हैं विशेष फ्लाइट ट्रायल

वर्तमान में भारतीय नौसेना द्वारा गोवा में राफेल मरीन के गहन फ्लाइट ट्रायल किए जा रहे हैं। इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि INS विक्रांत के डेक और स्की-जंप सिस्टम से विमान का संचालन किस प्रकार बेहतर बनाया जा सकता है। इसके जरिए युद्धपोत और विमान के बीच तालमेल को पूरी तरह अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक तकनीकी समायोजन पर काम किया जा रहा है।

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा समझौता

भारतीय नौसेना की मारक क्षमता को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से भारत ने फ्रांस के साथ एक बड़ा रक्षा समझौता किया है। इस सौदे के अंतर्गत कुल 26 राफेल मरीन जेट देश को मिलेंगे, जिसमें 22 सिंगल सीट फाइटर जेट और 4 ट्वीन-सीट ट्रेनर विमान शामिल हैं। इन सभी विमानों की डिलीवरी वर्ष 2030 तक पूरी होने की उम्मीद जताई गई है।

नौसेना के लिए क्यों खास हैं राफेल मरीन जेट

राफेल मरीन जेट के बेड़े में शामिल होने से विमानवाहक पोत आधारित वायु शक्ति को अभेद्य मजबूती मिलेगी। ये विमान न केवल हवाई सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएंगे, बल्कि समुद्र और जमीन पर मौजूद लक्ष्यों पर सटीक हमला करने में भी पूरी तरह सक्षम हैं। वर्तमान में इनका उपयोग केवल फ्रांसीसी नौसेना द्वारा किया जाता है और इनके आने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी।

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