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राहुल गांधी के ट्वीट पर निर्मला सीतारमण के नाम की स्पेलिंग को लेकर छिड़ी बहस, कांग्रेस ने बताया रणनीति

राहुल गांधी के ट्वीट पर निर्मला सीतारमण के नाम की स्पेलिंग को लेकर छिड़ी बहस, कांग्रेस ने बताया रणनीति

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा सोशल मीडिया पर केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम की स्पेलिंग गलत लिखने का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने इस पर सफाई देते हुए इसे ध्यान खींचने की एक खास रणनीति बताया है।

सोशल मीडिया पर हुई तीखी बहस

इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली थी। राहुल गांधी ने सरकार पर टाटा समूह में चल रहे नेतृत्व विवाद के बीच उसे नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि इस कथित दखलंदाजी के खिलाफ कोई भी कारोबारी नेता खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि भारतीय व्यवसाय किसी के खिलौने नहीं हैं।

निर्मला सीतारमण का पलटवार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए कहा कि राहुल गांधी कारोबारी नेताओं को उकसाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि उनके जरिए समाज में अविश्वास और नफरत फैलाई जा सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि व्यावसायिक और कानूनी मामलों को बेवजह आपराधिक रंग देना पूरी तरह गलत है। साथ ही, उन्होंने सरकार की नीतियों का समर्थन करते हुए कहा कि प्रशासन हमेशा से देश में उद्यम, उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने के पक्ष में रहा है।

कांग्रेस ने बताया टाइपो मार्केटिंग

जब सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और भाजपा समर्थकों ने राहुल गांधी द्वारा वित्त मंत्री के नाम को गलत लिखे जाने पर सवाल उठाए, तो कांग्रेस पार्टी बचाव में उतर आई। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि संचार माध्यमों में जानबूझकर गलत वर्तनी का इस्तेमाल करना लोगों का ध्यान आकर्षित करने का एक तरीका होता है, जिसे टाइपो मार्केटिंग कहा जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस गलती को तूल देकर भाजपा समर्थकों ने अनजाने में राहुल गांधी के संदेश को और अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद कर दी है।

यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब टाटा संस के नेतृत्व को लेकर घमासान मचा हुआ है और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने एक बोर्ड प्रस्ताव को चुनौती दी है। राजनीतिक तकरार के बीच इस मुद्दे पर विभिन्न पक्षों की ओर से बयानबाजी लगातार जारी है।

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