भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की 13 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के पंजीकरण प्रमाण पत्र रद्द कर दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद ये कंपनियां अब किसी भी तरह का गैर-बैंकिंग वित्तीय कारोबार नहीं कर सकेंगी। केंद्रीय बैंक द्वारा यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत प्रद शक्तियों के अनुसार उठाया गया है।
रद्द किए गए पंजीकरणों का विवरण
आरबीआई की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जिन 13 कंपनियों के पंजीकरण रद्द किए गए हैं, उनमें से 11 कंपनियां पश्चिम बंगाल में पंजीकृत थीं, जबकि शेष दो कंपनियां तमिलनाडु से संबंधित थीं। इन सभी कंपनियों के संबंध में सितंबर 2026 के दौरान अलग-अलग तिथियों पर आदेश जारी किए गए थे।
इन कंपनियों में नकोदर फाइनेंस, अजितनाथ स्टील्स, एस्ट्रोल डीलकॉम, भाग्यश्री ट्रेडिंग, बू फाइनेंस कंपनी और ब्रिटेक्स फाइनेंशियल सर्विसेज शामिल हैं। इसके साथ ही साजिली विनिमय, भूमिका फिस्कल सर्विसेज, ब्लू माउंट एक्सपोर्ट्स, डेल्टा कैपिटल मार्केट, राजेश फिस्कल सर्विसेज, सरला फाइनेंस और श्रेयांस व्यापार के नाम भी इस सूची में शामिल हैं। आदेश के बाद ये सभी संस्थान आरबीआई अधिनियम के तहत वित्तीय कारोबार संचालित करने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
10 कंपनियों ने स्वेच्छा से लौटाए पंजीकरण
इस बीच, केंद्रीय बैंक ने यह भी घोषणा की है कि 10 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों ने अपने पंजीकरण प्रमाण पत्र खुद ही सरेंडर (समर्पण) कर दिए हैं। कंपनियों द्वारा यह कदम कारोबार से बाहर होने, विनियामक वर्गीकरण में बदलाव और कानूनी अस्तित्व समाप्त होने जैसे विभिन्न कारणों से उठाया गया है।
व्यवसाय छोड़ने वाली कंपनियों में प्रगति फिनकैप, राजलक्ष्मी वाणिज्य, विवृति कैपिटल, एमएसजे कॉलोनाइजिंग एंड लीजिंग कंपनी, पीकेएसएल इन्वेस्टमेंट और एचसीएल कॉर्पोरेशन शामिल हैं। इसके अलावा, पीसीआर इन्वेस्टमेंट्स, अपर्णा इन्वेस्टमेंट, वंदना गृह निर्माण लिमिटेड और रामिसारिया बिल्डर्स लिमिटेड ने भी अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस कर दिए हैं।

