भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में दुनिया भर में बढ़ते कर्ज के स्तर को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि वैश्विक कर्ज को बिल्कुल भी हल्के में नहीं लिया जा सकता और आर्थिक वृद्धि के बीच इस पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी है।
वैश्विक वित्तीय स्थिरता और चुनौतियां
नई दिल्ली में आयोजित कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव के दौरान वैश्विक वित्तीय स्थिरता पर चर्चा करते हुए गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि आज की वित्तीय मजबूती इस बात की गारंटी नहीं है कि कल भी पूरी सुरक्षा बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि बैंकिंग और वित्तीय दबाव बहुत तेजी से पैदा हो सकते हैं, लेकिन उन्हें सुलझाने में लंबा समय और काफी संघर्ष करना पड़ता है।
अर्थव्यवस्था के सामने पांच प्रमुख जोखिम
संजय मल्होत्रा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के समक्ष पांच मुख्य जोखिमों को रेखांकित किया है, जो इस प्रकार हैं:
- बढ़ता हुआ वैश्विक कर्ज
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से किया जाने वाला परिसंपत्ति मूल्यांकन
- सामान्य से बहुत अधिक लीवरेज यानी अत्यधिक कर्ज
- प्राइवेट क्रेडिट
- साइबर जोखिम
उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही ये जोखिम व्यक्तिगत रूप से अभी बहुत बड़ी चिंता का कारण न लगें, लेकिन यदि ये सभी एक साथ मिल जाएं तो वैश्विक वित्तीय ढांचे पर भारी दबाव डाल सकते हैं।
कर्ज बढ़ने के गंभीर प्रभाव
गवर्नर ने समझाया कि दुनिया भर में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की तुलना में कर्ज का अनुपात बढ़ गया है और सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल भी सख्त हुआ है। सरकारों के लिए उधारी महंगी होने से उनकी राजकोषीय गुंजाइश कम होती जा रही है। इसके अलावा, कंपनियों के लिए भी वित्तीय हालात सख्त होने से उनका कर्ज चुकाना मुश्किल होता जा रहा है।
क्रिप्टोकरेंसी पर रुख
क्रिप्टोकरेंसी के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसको लेकर भारत का रुख अभी भी सतर्क बना हुआ है। केंद्रीय बैंक टोकनाइजेशन जैसी नई तकनीकों को बढ़ावा दे रहा है, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी को लेकर पूंजी प्रवाह और एकल मुद्रा के प्रचलन जैसी विभिन्न चिंताओं के कारण सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

