संयुक्त बैंक खाताधारकों के बीच साझा वित्त का प्रबंधन करना बेहद आम है, लेकिन कई लोगों को इसके नियमों की पूरी जानकारी नहीं होती है। किसी एक खाता धारक की मृत्यु होने पर अक्सर यह मान लिया जाता है कि जीवित खाताधारक ही सारी राशि का पूर्ण मालिक बन गया है, हालांकि वास्तविकता इससे अलग होती है।
आरबीआई के नियम और संचालन निर्देश
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, संयुक्त खातों में से किसी एक की मृत्यु के बाद बैंक जीवित खाताधारकों को नियमों के तहत नॉमिनेशन बदलने या रद्द करने की अनुमति दे सकता है। यह नियम ‘आइदर और सर्वाइवर’ जैसे ऑपरेटिंग निर्देशों वाले खातों पर भी लागू होता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि संयुक्त जमा खाते में नॉमिनी का अधिकार तभी बनता है जब सभी खाताधारकों की मृत्यु हो चुकी हो।
धन प्राप्ति बनाम मालिकाना हक
आरबीआई के नियमों के मुताबिक, बैंक से पैसे प्राप्त करने वाला जीवित खाताधारक उस राशि का अकेला मालिक नहीं बनता, बल्कि वह मृत व्यक्ति के कानूनी वारिसों के लिए एक ‘ट्रस्टी’ या संरक्षक के रूप में काम करता है। यदि मृत व्यक्ति के कानूनी वारिसों का संपत्ति पर वैध दावा है, तो वे बैंक द्वारा पैसे ट्रांसफर किए जाने के बाद भी अपनी मांग रख सकते हैं।
खाते के पैसों का सही निपटान करने के लिए जीवित खाताधारक और मृतक के सभी कानूनी वारिसों की सहमति व उपस्थिति आवश्यक होती है। किसी भी खाताधारक की मृत्यु के बाद तुरंत बैंक को इसकी सूचना देनी चाहिए। आरबीआई के ग्राहक सेवा ढांचे के तहत, सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने के 15 दिनों के भीतर बैंकों को राशि का भुगतान करना अनिवार्य होता है। इसके अलावा, किसी भी खाताधारक की मृत्यु के बाद एटीएम या इंटरनेट बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

