Site icon Memoirs Publishing

आरजी कर मामला: संदीप घोष की जमानत पर माता-पिता ने जताई आपत्ति, 12 नवंबर को प्रदर्शन का ऐलान

आरजी कर मामला: संदीप घोष की जमानत पर माता-पिता ने जताई आपत्ति, 12 नवंबर को प्रदर्शन का ऐलान

कोलकाता के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की महिला चिकित्सक के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या मामले में पीड़िता के माता-पिता ने पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस बीच, न्याय में देरी और जांच की धीमी गति से नाराज दो प्रमुख नागरिक संगठनों ने आगामी 12 नवंबर को सीबीआई कार्यालय तक विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। यह मार्च आरजी कर अस्पताल से शुरू होकर सीबीआई कार्यालय तक जाएगा, जिसमें आम नागरिकों और विशेषकर महिलाओं से शामिल होने की अपील की गई है।

माता-पिता ने उठाए गंभीर सवाल और जांच की मांग

पीड़िता के माता-पिता ने पूर्व प्राचार्य को जमानत मिलने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि संदीप घोष को इस मामले में उम्रकैद की सजा मिलनी चाहिए थी। पीड़िता की मां, जो वर्तमान में भाजपा विधायक भी हैं, ने सवाल उठाया कि उनकी बेटी की मौत से ठीक पहले के घंटों में उसके साथ कौन-कौन मौजूद था, उनसे अभी तक पूछताछ क्यों नहीं की गई। उन्होंने डॉक्टरों के हवाले से बताया कि मौत का समय आधी रात से सुबह छह बजे के बीच का बताया गया है, इसलिए उस अवधि से जुड़े लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

साक्ष्य छिपाने और साजिशकर्ताओं पर कार्रवाई का आरोप

परिवार ने मामले की जांच प्रक्रिया पर असंतोष जताते हुए तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव एनएस निगम सहित अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि घटना के बाद साक्ष्यों को नष्ट करने के लिए जल्दबाजी में कदम उठाए गए थे। परिवार ने मांग की है कि इस जघन्य अपराध के पीछे के असली साजिशकर्ताओं की पहचान करके उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

12 नवंबर को सीबीआई कार्यालय तक मार्च

‘वायस ऑफ अभया’ और ‘वायस ऑफ विमेन’ नामक दो नागरिक संगठनों ने मिलकर 12 नवंबर को विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। आयोजकों का कहना है कि सीबीआई को उपलब्ध पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए और पूरी जांच प्रक्रिया में जवाबदेही तय होनी चाहिए। गौरतलब है कि सर्वोच्च अदालत ने गत 17 अक्टूबर को भ्रष्टाचार के एक मामले में संदीप घोष को जमानत प्रदान की थी, जिसके बाद से लगातार विरोध के स्वर उठ रहे हैं।

Exit mobile version