दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह याचिका खर्गे द्वारा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले से जुड़ी हुई है। विशेष न्यायाधीश रूबी अल्का गुप्ता ने इस मामले में आदेश सुनाने की तारीख 20 नवंबर तय की है।
सुनवाई के दौरान रखे गए लिखित तर्क और पक्ष
सुनवाई के दौरान अदालत में दोनों पक्षों की तरफ से कानूनी दस्तावेज और दलीलें पेश की गईं। याचिकाकर्ता रवींद्र गुप्ता की ओर से अधिवक्ता गगन गांधी ने अपने लिखित तर्क अदालत में दाखिल किए, जबकि मल्लिकार्जुन खर्गे की तरफ से अधिवक्ता प्रज्वल सिंह ने अपना पक्ष रखा। इससे पहले 14 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान खर्गे का एक बयान पेन ड्राइव के जरिए अदालत को सौंपा गया था और उस दिन याचिकाकर्ता की ओर से बहस पूरी कर ली गई थी। इसके अतिरिक्त, 28 सितंबर को खर्गे की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने कहा था कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कांग्रेस प्रमुख के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को खारिज करके एक कानूनी निर्णय लिया था।
कर्नाटक चुनाव और बयानों से जुड़ा विवाद
यह पूरा कानूनी विवाद कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान 27 अप्रैल 2023 को दिए गए बयानों से उत्पन्न हुआ है। याचिकाकर्ता रवींद्र गुप्ता ने अदालत में कहा कि आरएसएस के एक सदस्य के रूप में खर्गे की टिप्पणियों से उन्हें गहरी ठेस पहुंची है। इसके बाद उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता के खिलाफ पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने की मांग उठाई थी। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि खर्गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे।
अदालती प्रक्रिया का सफर
शुरुआत में तीस हजारी की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मल्लिकार्जुन खर्गे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया था। इस फैसले के बाद याचिकाकर्ता ने सत्र अदालत का रुख किया। चूंकि मल्लिकार्जुन खर्गे एक राज्यसभा सांसद हैं, इसलिए उनके खिलाफ यह याचिका अब राउज एवेन्यू में स्थित विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही है। कानूनी कार्यवाही के एक अन्य चरण में, 19 सितंबर को खर्गे ने इस बात पर लिखित मुचलका या हलफनामा देने से इनकार कर दिया था कि वह आरएसएस के खिलाफ कोई भी मानहानिपूर्ण बयान नहीं देंगे।

