स्विस एयर क्वालिटी मॉनिटर IQAir द्वारा जारी की गई नई रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में सिंगापुर ने दिल्ली को पीछे छोड़ दिया है। इस ताजा सूची में सिंगापुर पहले स्थान पर है, जबकि दिल्ली दूसरे स्थान पर बना हुआ है और मुंबई भी इस सूची में शामिल है।
सिंगापुर में प्रदूषण का मुख्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, सिंगापुर में वायु प्रदूषण बढ़ने की मुख्य वजह इंडोनेशिया के जंगलों में लगी आग है। इस आग से निकलने वाला धुआं दक्षिण-पूर्व एशिया के एक बड़े हिस्से में फैल रहा है, जिसके कारण सिंगापुर, मलेशिया और आसपास के क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है। IQAir के आंकड़ों के अनुसार सिंगापुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई ‘अनहेल्दी’ या ‘वेरी अनहेल्दी’ श्रेणी में पहुंच चुका है। इस स्थिति से निपटने के लिए सिंगापुर सरकार ने स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी राहत के लिए सब्सिडी भी शुरू की है। इस सूची में कुआलालंपुर, हनोई, ढाका और जकार्ता जैसे अन्य शहर भी शामिल हैं।
ग्रेटर नोएडा देश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर
दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर भी हवा की गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है। टूटी सड़कों और निर्माण स्थलों से उड़ रही धूल के कारण हवा सांस लेने योग्य नहीं बची है। हालिया आंकड़ों के अनुसार नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक 203 और ग्रेटर नोएडा का 225 दर्ज किया गया है, जिसके चलते ग्रेटर नोएडा देश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया है।
मौसम विभाग और स्थानीय विशेषज्ञों का कहना है कि करीब 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं के कारण प्रदूषक कण एक ही स्थान पर एकत्र नहीं हो पा रहे हैं, जिससे एक्यूआई को ‘रेड जोन’ यानी गंभीर श्रेणी में जाने से फिलहाल राहत मिली है। हालांकि, लगातार तीसरे दिन भी हवा ‘ऑरेंज जोन’ यानी खराब श्रेणी में बनी हुई है, जिसके कारण नागरिकों को आंखों में जलन और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

