भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस फैसले में दखल देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है, जिसके तहत कांग्रेस पार्टी के नंदीग्राम उपचुनाव उम्मीदवार को चुनाव प्रचार में भाग लेने और अन्य चुनावी गतिविधियों के वास्ते अंतरिम जमानत दी गई थी। अदालत ने अपनी सुनवाई के दौरान यह रेखांकित किया कि उच्च न्यायालय द्वारा प्रदान की गई यह राहत केवल एक सीमित उद्देश्य के लिए थी, जो 20 अक्टूबर तक प्रभावी है।
शीर्ष अदालत का रुख और निर्देश
यह महत्वपूर्ण मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर General तुषार मेहता को यह अनुमति दी कि यदि कांग्रेस उम्मीदवार अपने खिलाफ लंबित अन्य आपराधिक मामलों में इस अंतरिम जमानत अवधि को आगे बढ़ाने के लिए उच्च न्यायालय का रुख करते हैं, तो राज्य सरकार अपनी आपत्तियां और दलीलें वहां रख सकती है। पीठ ने यह भी संज्ञान लिया कि हालांकि उम्मीदवार के खिलाफ दर्ज मामलों की सूची में कुछ गंभीर अपराध भी शामिल हैं, किंतु कलकत्ता उच्च न्यायालय के इस आदेश का मुख्य उद्देश्य उन्हें चुनाव लड़ने और मतों की गिनती में भाग लेने का अवसर देना था।
गिरफ्तारी और चुनावी घटनाक्रम की पृष्ठभूमि
इससे पहले, शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की थी जिसमें छह आपराधिक मामलों में दी गई इस अंतरिम जमानत को चुनौती दी गई थी। ये सभी मामले 19 वर्ष पुराने हैं और वर्ष 2007 के नंदीग्राम आंदोलन के दौरान उत्पन्न हुए थे। कांग्रेस उम्मीदवार को इन पुराने मामलों के सिलसिले में 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र के लिए उपचुनाव 6 अक्टूबर को संपन्न हुआ था, जबकि डाले गए मतों की गिनती 9 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। अदालत के निर्देशों के अनुसार, उच्च न्यायालय ने यह अंतरिम जमानत केवल सीमित समय यानी 20 अक्टूबर तक के लिए ही मंजूर की थी ताकि वह सुचारू रूप से चुनाव प्रचार और मतगणना प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।

