सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2025 की सड़क दुर्घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करने में हुई देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने केंद्र से पूछा है कि वार्षिक रिपोर्ट जारी करने के पुराने आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया और इस पर सरकार का क्या रुख है।
सड़क दुर्घटना रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
अदालत ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से 25 नवंबर तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि सर्वोच्च अदालत ने पहले ही निर्देश दिया था कि हर साल सड़क हादसों की वार्षिक रिपोर्ट वर्ष समाप्त होने के छह महीने के भीतर प्रकाशित कर दी जानी चाहिए। इस नियम के अनुसार वर्ष 2025 की रिपोर्ट तय समयसीमा के भीतर आ जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं होने पर यह कदम उठाया गया है।
आंकड़ों की समय पर उपलब्धता क्यों है जरूरी
सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं को रोकने की नीतियों के लिए ये आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। समय पर रिपोर्ट मिलने से यह स्पष्ट होता है कि किन राज्यों, जिलों या विशेष सड़कों पर सबसे ज्यादा हादसे हो रहे हैं और उनके मुख्य कारण क्या हैं। इन आंकड़ों के आधार पर ही संबंधित विभाग और एजेंसियां दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां जरूरी सुधार कार्य कर सकती हैं।
आगरा में भारी वाहनों के प्रवेश का मामला
इसके अलावा, अदालत में आगरा से जुड़ा एक अन्य मामला भी उठाया गया जिसमें शहर के भीतर से भारी वाहनों के गुजरने पर चिंता व्यक्त की गई है। उत्तरी बाइपास बन जाने के बावजूद भारी वाहनों के शहर के बीच से निकलने के कारण राहगीरों, स्कूली बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा पर लगातार खतरा बना हुआ है। इस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी किया है।

