सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इंडी गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत निर्वाचन आयोग और शीर्ष अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। यह याचिका मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने के कदम को चुनौती देने के लिए दाखिल की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने शीर्ष अदालत की ओर निकाले गए राजनीतिक मार्च और उसके कारण मची अफरा-तफरी पर भी गंभीर सवाल उठाए।
चुनाव आयोग और नेताओं को नोटिस जारी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने चुनाव आयोग के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य आयुक्तों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। इसके अलावा, अदालत ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा दायर अलग-अलग याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट में मतदाता सूची से जुड़ी सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की जाएगी, जबकि प्रदर्शनों पर पाबंदियों से जुड़े मामलों की सुनवाई अलग से होगी।
मार्च और अव्यवस्था पर अदालत की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए मार्च और वहां जमा हुई भारी भीड़ के संबंध में कड़ा रुख अपनाया। वकीलों की ओर से यह मुद्दा उठाया गया कि इस तरह का राजनीतिक जुलूस और परिसर में भीड़ जुटना स्वीकार्य नहीं है और इसे दबाव बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट रूप से टिप्पणी की कि न्यायपालिका को कोई भी डरा-धमका नहीं सकता। अदालत ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं को अपने आचरण पर स्पष्टीकरण देना होगा।

