सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए एक कड़ा कदम उठाते हुए राज्य के 50 वार्डों में नए सिरे से चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। इनमें पटियाला नगर निगम के 28 वार्ड और बाघापुराना तथा धर्मकोट नगर परिषदों के 22 वार्ड शामिल हैं। अदालत ने इन चुनावों को पूरी तरह से पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से संपन्न कराने के लिए एक मजबूत न्यायिक निगरानी तंत्र स्थापित किया है।
निगरानी समिति और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति
शीर्ष अदालत ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि वे चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक सप्ताह के भीतर एक समिति का गठन करें। इस निगरानी समिति में उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को शामिल किया जाएगा, जो चुनाव अधिसूचना जारी होने से लेकर परिणाम घोषित होने तक पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेंगे। इसके अलावा, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उच्च न्यायालय बार के दो-तीन वरिष्ठ सदस्यों को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करने का भी अनुरोध किया गया है।
वीडियोग्राफी और सुरक्षा के कड़े निर्देश
अदालत के आदेश के अनुसार, नामांकन पत्र दाखिल करने, उनकी जांच करने, चुनाव चिन्हों के आवंटन और मतदान जैसी सभी प्रमुख प्रक्रियाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। ये रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाएंगी और निगरानी समिति को सौंपी जाएंगी। पंजाब सरकार को चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और डीएसपी रैंक या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारियों की वार्ड-वार सूची समिति को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
तय समय सीमा में पूरी होगी प्रक्रिया
यह पूरा चुनावी सिलसिला छह सप्ताह के भीतर पूरा किया जाना है। अदालत के स्पष्ट निर्देश हैं कि जब तक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को यह संतुष्टि नहीं हो जाती कि चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष रूप से संपन्न हुए हैं, तब तक परिणामों की घोषणा नहीं की जाएगी। यह पूरा घटनाक्रम दिसंबर 2024 के नगर निकाय चुनावों के दौरान उम्मीदवारों द्वारा नामांकन दाखिल करने में बाधा डालने और अन्य अनियमितताओं के आरोपों के बाद सामने आए कानूनी विवाद का परिणाम है।

