सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें न्यायालय परिसर के भीतर राजनीतिक गतिविधियों और प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इस याचिका में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश तय किए जाने का आग्रह किया गया है।
याचिका में क्या की गई है मांग
चार वकीलों द्वारा एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के माध्यम से दाखिल की गई इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट और देश के सभी उच्च न्यायालयों के परिसरों के भीतर राजनीतिक जुलूस, धरने, नारेबाजी, झंडे-बैनर के प्रदर्शन और राजनीतिक प्रेस कॉन्फ्रेंस पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग उठाई गई है। वरिष्ठ वकील ने इस मामले को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष रखकर जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था।
प्रमुख नेताओं और घटनाओं का जिक्र
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, चुनाव संबंधी मुद्दों और अन्य विषयों को लेकर हाल ही में नेताओं और समर्थकों ने न्यायालय की ओर मार्च किया था, जिसे पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रास्ते में ही रोक दिया था, हालांकि नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को याचिका दाखिल करने के लिए अंदर जाने की अनुमति दी गई थी। इस याचिका में कुछ प्रमुख राजनीतिक नेताओं के आचरण की जांच करने और इंटरनेट मीडिया पर दिए गए बयानों का उल्लेख करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध भी किया गया है।
अन्य प्रदर्शन संबंधी मामलों की सुनवाई टली
दूसरी ओर, दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों, मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने और ट्रेन सेवाओं में व्यवधान से जुड़ी अन्य याचिकाओं पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने टाल दी है। एक न्यायूर्ति के अस्वस्थ होने के कारण पीठ ने इस मामले की सुनवाई को स्थगित करने का निर्णय लिया। अदालत ने केंद्र सरकार को संबंधित मामलों में हलफनामा दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय भी प्रदान किया है।

