सुप्रीम कोर्ट द्वारा उस याचिका पर सुनवाई की संभावना है जिसमें ‘वंदे मातरम’ गीत को राष्ट्रीय गान के समान दर्जा दिलाने की मांग वाली जनहित याचिका को दिल्ली उच्च न्यायालय से शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने का आग्रह किया गया है। शीर्ष अदालत की वेबसाइट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। यह याचिका वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर की गई है और इसके लिए वकील अश्वनी दुबे के माध्यम से अपील की गई है।
याचिका में दलील दी गई है कि इस जनहित याचिका को दिल्ली उच्च न्यायालय से सर्वोच्च अदालत में स्थानांतरित कर दिया जाए क्योंकि इसी तरह की एक अन्य रिट याचिका पहले से ही यहां लंबित है। याचिका में कहा गया है कि ‘वंदे मातरम’ हमारे इतिहास, संप्रभुता, एकता और गर्व का प्रतीक है। इसके साथ ही, केंद्र और दिल्ली सरकार को यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि देश के सभी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में हर कार्य दिवस पर ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम’ दोनों को गाया व बजाया जाए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि उचित दिशा-निर्देशों या नियमों के अभाव में ‘वंदे मातरम’ को कई बार फिल्मों और पार्टियों में गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। याचिका के अनुसार, इस गीत ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है और वर्ष 1950 में संविधान सभा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद द्वारा दिए गए बयान के मद्देनजर इसे ‘जन गण मन’ के समान ही सम्मान मिलना चाहिए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि सरकार का यह कर्तव्य है कि वह देश को एकजुट रखने के लिए ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम’ दोनों के प्रचार-प्रसार हेतु एक राष्ट्रीय नीति बनाए। इसमें जोर दिया गया है कि ‘वंदे मातरम’ का किसी भी प्रकार से नाटकीय रूपांतरण नहीं किया जाना चाहिए और इसे किसी भी वैरायटी शो का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए, ताकि हर कोई इसके बजने या गाए जाने पर पूरा सम्मान दे सके।

