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कपड़ों की खरीदारी करते समय क्यों जरूरी है उनके लेबल को ध्यान से समझना?

कपड़ों की खरीदारी करते समय क्यों जरूरी है उनके लेबल को ध्यान से समझना?

त्योहारों के इस सीजन में लोग जमकर खरीदारी करते हैं, लेकिन कई बार कपड़ों के लेबल पर लिखी बातें पूरी तरह सच नहीं होतीं। हाल ही में ऑनलाइन खरीदे गए एक ऊनी स्वेटर में नाममात्र का ही ऊन मिलने और बाकी हिस्सा सिंथेटिक पाए जाने का मामला सामने आया है। इस तरह के मामलों से पता चलता है कि कपड़े खरीदते वक्त उनकी सही बनावट और गुणवत्ता को परखना कितना आवश्यक हो गया है।

यूरोपीय आयोग की जांच और चौंकाने वाले आंकड़े

बदलते मौसम के पैटर्न के बीच कपड़ों की गुणवत्ता को लेकर किए गए एक अध्ययन से महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं। यूरोपीय आयोग द्वारा की गई जांच में बड़ी संख्या में कपड़ों के फाइबर कंपोजीशन के लेबल गलत पाए गए। इनमें टॉप, बच्चों के कपड़े, एक्टिववियर और स्कार्फ जैसे कई आइटम शामिल थे। जांच में सामने आया कि प्राकृतिक और सिंथेटिक फाइबर के मिश्रण वाले कपड़ों में गड़बड़ी मिलने की दर सबसे अधिक थी, जबकि सौ फीसदी प्राकृतिक फाइबर वाले कपड़ों में यह समस्या थोड़ी कम पाई गई। दिलचस्प बात यह है कि ऑनलाइन खरीदे गए कपड़ों में नियमों के उल्लंघन की दर फिजिकल स्टोर की तुलना में अधिक थी।

भ्रमित करने वाले शब्दों वाले कुछ प्रमुख लेबल

बाजार में बिकने वाले कपड़ों पर कई ऐसे आकर्षक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, जो ग्राहकों को भ्रमित कर सकते हैं:

लागत घटाने के हथकंडे और बचाव का तरीका

विशेषज्ञों के अनुसार, कई निर्माण इकाइयां लागत में कटौती के लिए असली फाइबर के विकल्प इस्तेमाल करती हैं और तैयार माल की जांच बेहद कम होती है। वैश्विक स्तर पर पॉलिएस्टर का उत्पादन सबसे अधिक होता है क्योंकि यह निर्माताओं के लिए बेहद लोकप्रिय विकल्प है। ऐसे में ग्राहकों के लिए सबसे बेहतर उपाय यही है कि वे कपड़ों के अनुभव और इस्तेमाल के आधार पर सही परख करना सीखें, ताकि अगली बार खरीदारी करते समय वे किसी भी तरह के भ्रम से बच सकें।

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