केरल में विजयदशमी के पावन अवसर पर पारंपरिक विद्यारंभ समारोह के साथ हजारों बच्चों ने ज्ञान और अक्षरों की दुनिया में अपने पहले कदम रखे। बुधवार को राज्य भर के मंदिरों और विशेष रूप से तैयार किए गए शिक्षण हॉल में बच्चों ने अपने माता-पिता की उपस्थिति में इस पारंपरिक अनुष्ठान में भाग लिया।
विद्यारंभ समारोह के तहत, तीन से पांच वर्ष की आयु के बच्चों को शिक्षा की औपचारिक शुरुआत कराई जाती है। इस रस्म में आचार्य या बुजुर्ग बच्चे की जीभ पर सोने के उपकरण से ‘हरि श्री गणपतये नमः’ लिखते हैं और फिर उन्हें चावल या रेत पर अपनी अंगुली से अक्षर ट्रेस करने में मदद करते हैं। दुर्गाष्टमी पर देवी सरस्वती के सामने पूजी जाने वाली पुस्तकों और पठन सामग्री को विजयदशमी की सुबह बाहर निकाला जाता है, जिससे सीखने की प्रक्रिया फिर से शुरू होती है।
प्रमुख मंदिरों में उमड़ी भारी भीड़
राज्य के प्रसिद्ध मंदिरों जैसे कोट्टायम के पनाचिक्काद सरस्वती मंदिर और कोझिकोड के श्री पिशारिकावु मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पनाचिक्काद में सुबह चार बजे से ही विद्यारंभ समारोह शुरू हो गया था, जहां बड़ी संख्या में बच्चों ने भाग लिया। मंदिर प्रशासन द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने और सुचारू रूप से अनुष्ठान संपन्न कराने के लिए विशेष कतारों और व्यवस्थाओं का प्रबंध किया गया था।
दिग्गजों ने बच्चों को कराई अक्षरों की शुरुआत
इस शुभ अवसर पर राजनीतिक हस्तियों और गणमान्य लोगों ने भी बच्चों को शिक्षा की पहली सीढ़ी चढ़ाई। राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य प्रमुख नेताओं ने अपने आवासों और आधिकारिक स्थलों पर बच्चों का स्वागत किया तथा उन्हें अपने हाथों से अक्षरों का ज्ञान कराया। परिवारों के लिए यह दिन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान से बढ़कर बच्चों के जीवन का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।

