आरा-पटना मेमू पैसेंजर ट्रेन के डिब्बों में सीटों की अनुपस्थिति ने यात्रियों के सफर को बेहद कठिन बना दिया है। रेलवे द्वारा आधुनिक सुविधाओं और बेहतर सुरक्षा के दावों के बीच इस रूट की ट्रेनों की बदहाली इन दावों की पोल खोल रही है।
यात्रियों की बढ़ती मुसीबतें
दानापुर रेलवे डिवीजन के अंतर्गत चलने वाली इस मेमू ट्रेन से रोजाना बड़ी संख्या में छात्र, कामकाजी पेशेवर और व्यापारी यात्रा करते हैं। ट्रेन में पहले से ही भीड़भाड़ और देरी की समस्या बनी रहती है, ऐसे में बैठने की उचित व्यवस्था न होने से बुजुर्गों, महिलाओं और दूर की यात्रा करने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई कोचों में या तो सीटें पूरी तरह गायब हैं या फिर उनके केवल लोहे के ढांचे ही बचे हैं। यात्रियों का कहना है कि पूरा किराया चुकाने के बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और देखरेख पर सवाल
ट्रेन के डिब्बों से इस तरह सीटें गायब होना रेलवे संपत्ति की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी बड़े सवालिया निशान लगाता है। डिब्बों से सीटें चोरी होने या उनके क्षतिग्रस्त होने जैसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि रेलवे यार्ड और मेंटेनेंस डिपो में लगे सीसीटीवी कैमरों के बावजूद ऐसा कैसे हो रहा है। इसके अलावा, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिनकी जिम्मेदारी रेलवे संपत्ति की रक्षा करना है।
रेलवे अधिकारियों की प्रतिक्रिया
मामले के तूल पकड़ने के बाद दानापुर के मंडलीय रेल प्रबंधक (DRM) विनोद कुमार ने स्वीकार किया कि सीटों की यह स्थिति अस्वीकार्य है और इसमें रेलवे कर्मचारियों की लापरवाही नजर आती है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि इस मामले की जांच कराई जाएगी और जल्द से जल्द व्यवस्था को सुधारते हुए संबंधित कोच को हटाया जाएगा। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने भी इस समस्या का जल्द समाधान करने का आश्वासन दिया है।

