बिहार को हर साल आने वाली बाढ़ की समस्या से निजात दिलाने और राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार के बीच आपसी सहमति से यह एमओयू साइन किया गया, जिसके तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण नदियों और जल निकायों की सफाई कराएगा।
नदी संजीवनी प्रोजेक्ट और वेस्ट टू वेल्थ का मंत्र
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस साझा पहल की जानकारी देते हुए इसे ‘नदी संजीवनी’ नाम दिया है। उन्होंने बताया कि बिहार में नदियों में सिल्ट जमा होने के कारण हर साल भारी नुकसान होता है, जबकि दूसरी तरफ सड़क निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में मिट्टी की आवश्यकता होती है। इस परियोजना के तहत ‘वेस्ट टू वेल्थ’ के सिद्धांत पर काम करते हुए जल स्रोतों से गाद निकाली जाएगी और इसका उपयोग हाईवे निर्माण में किया जाएगा। खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में डीसिल्टिंग का खर्च हाईवे बनाने वाले ठेकेदार खुद उठाएंगे और राज्य सरकार के खजाने से एक भी रुपया खर्च नहीं होगा।
सिंचाई क्षमता में सुधार और भविष्य की योजनाएं
इस योजना से न केवल सड़कों के लिए सामग्री मिलेगी, बल्कि नदियों की जलधारण क्षमता और राज्य की सिंचाई क्षमता भी बढ़ेगी। कार्यक्रम के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी हिस्सा लिया और जल स्रोतों के पुनरोद्धार के लिए बनाई गई नई नीति का जिक्र किया। इसके अलावा, एनएचएआई के चेयरमैन संतोष यादव ने बताया कि राज्य में वर्तमान में कई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं चल रही हैं और भविष्य के विजन के तहत एक लाख तक की आबादी वाले क्षेत्रों में भी रिंग रोड या बाईपास बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है।

