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दिल्ली की हवा हुई बेहद खराब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के इन शहरों में प्रदूषण का बुरा हाल

दिल्ली की हवा हुई बेहद खराब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के इन शहरों में प्रदूषण का बुरा हाल

उत्तर भारत में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता गंभीर स्तर के करीब पहुंच गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 391 के स्तर पर दर्ज किया गया, जिससे शहर घनी धुंध की चादर में लिपटा नजर आ रहा है। प्रदूषण का यह संकट केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और देश के अन्य हिस्सों के कई शहर भी इसकी चपेट में हैं।

उत्तर प्रदेश और हरियाणा के इन शहरों में स्थिति गंभीर

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के गजरौला और हरियाणा के पंचगांव में हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई है। गजरौला में AQI 407 और पंचगांव में 406 दर्ज किया गया। इसके अलावा, ओडिशा के पारादीप में AQI 393, उत्तर प्रदेश के अनपरा और हरियाणा के मानेसर में यह 343 दर्ज किया गया। एनसीआर के अन्य शहरों जैसे भिवाड़ी, गुरुग्राम, हिसार, और फरीदाबाद में भी हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली के कई निगरानी केंद्रों पर हालात बदतर

दिल्ली के कुल निगरानी केंद्रों में से आधे से अधिक स्थानों पर हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में पाई गई। रोहिणी और आईआईटी दिल्ली जैसे इलाकों में AQI का स्तर सबसे अधिक दर्ज किया गया। इसके अलावा पंजाबी बाग, आरके पुरम, आईटीओ और फिरोजशाह रोड पर भी वायु गुणवत्ता अत्यधिक खराब स्थिति में रही। वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के अनुसार, इस सीजन में दिल्ली में पहली बार गंभीर श्रेणी की हवा दर्ज की गई है, और आने वाले दिनों में भी स्थिति ऐसी ही बनी रहने की आशंका है।

प्रदूषण नियंत्रण के उपाय और राजनीतिक प्रतिक्रिया

बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए नगर निगम प्रशासन ने इंडिया गेट के आसपास पानी का छिड़काव करने वाले ट्रकों को तैनात किया है, जो ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण के तहत किया जा रहा है। इस बीच, राजनीतिक गलियारों में भी प्रदूषण को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। नेताओं ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) में बदलाव की मांग करते हुए औद्योगिक और आवासीय स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

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