धनतेरस का पर्व भगवान धन्वंतरि की कृपा और उनके प्रकटीकरण से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे, और जिस दिन वे बाहर आए थे, वह दिन धनतेरस का था। भगवान धन्वंतरि को देवताओं के वैद्य के रूप में जाना जाता है और इन्हें भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है। उनके स्वरूप और आशीर्वाद के साथ मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण बातें जुड़ी हुई हैं—पहला धन और दूसरा स्वास्थ्य।
धन्वंतरि जी के कलश में छिपे हैं धन और स्वास्थ्य
भगवान धन्वंतरि की विशेषता यह है कि वे संसार को चलाने के लिए संपत्ति भी प्रदान करते हैं और शरीर की रक्षा करने के लिए स्वास्थ्य का आशीर्वाद भी देते हैं। आरोग्य और स्वास्थ्य, ये दोनों ही चीजें धन्वंतरि जी के कलश में समाहित हैं। इन दोनों के बीच के अंतर को समझना जीवन को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक माना गया है। आरोग्य एक प्रकार की जीवनशैली है, जिसे अंग्रेजी में वेलनेस कहा जाता है और यह एक एक्टिव प्रैक्टिस की तरह होती है। वहीं दूसरी तरफ, स्वास्थ्य यानी हेल्थ एक निश्चित स्थिति है, जिसे रिएक्टिव रिजल्ट कहा जा सकता है।
जीवन का सच्चा संकल्प और मानसिक शांति
हर व्यक्ति की इच्छा होती है कि वह अपनी आयु के जितने भी वर्षों तक जिए, उसकी आखिरी सांस बिना किसी बेचैनी के आए। इस प्रकार की शांतिपूर्ण स्थिति प्राप्त करने का मार्ग धन्वंतरि जी की कृपा से जुड़ा हुआ है। इसलिए, धनतेरस के इस शुभ अवसर पर एक विशेष संकल्प लेने की प्रेरणा दी जाती है। इस संकल्प के तहत यह तय किया जा सकता है कि भविष्य में कभी भी ऐसा धन नहीं कमाया जाएगा, जिसका बुरा प्रभाव व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़े। इसके साथ ही, जीवन में बेहतर आरोग्य और स्वास्थ्य की जीवनशैली को अपनाने का मार्ग चुना जाना चाहिए ताकि शारीरिक और मानसिक संतुलन हमेशा बना रहे।

