दीपावली के अवसर पर उत्तर भारत और विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, इस बार आबोहवा के बिगड़ने के पीछे केवल पटाखों का धुआं ही नहीं, बल्कि मौसमी परिस्थितियां भी एक बड़ी वजह बनेंगी।
हवा की चाल और मौसम का बदलाव
उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली शुष्क हवाओं के मार्ग में बंगाल की खाड़ी से चलने वाली पूर्वी हवाओं के आने की संभावना है। इस बदलाव के कारण हवा की रफ्तार काफी धीमी हो सकती है। आठ और नौ नवंबर के दौरान दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में यह स्थिति देखने को मिल सकती है, जिससे प्रदूषक तत्व वातावरण में ठहर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पराली जलाने, वाहनों के धुएं, निर्माण कार्यों की धूल, औद्योगिक इकाइयों के उत्सर्जन और कचरा जलाने से उत्पन्न होने वाला प्रदूषण पहले से ही हवा में मौजूद है। ऐसे में पटाखों का धुआं इस समस्या को और अधिक गंभीर बना सकता है। हवा की गति कम होने और वेंटिलेशन इंडेक्स घटने के कारण प्रदूषण के कणों का बिखराव बेहद धीमा हो जाता है, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
देश के अन्य हिस्सों में मौसम का हाल
फिलहाल देश के एक बड़े हिस्से में शुष्क मौसम बना हुआ है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में निकट भविष्य में बारिश की कोई संभावना नहीं है। हालांकि, दीपावली के ठीक बाद एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिसके प्रभाव से जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश तथा बर्फबारी की उम्मीद है, लेकिन मैदानी इलाकों को अभी बारिश के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

