त्योहारों का मौसम शुरू होते ही बाजारों, दुकानों और इमारतों पर रंग-बिरंगी डेकोरेटिव लाइटें जगमगाने लगती हैं। रोशनी का यह त्योहार बिना बिजली के मुमकिन नहीं है, लेकिन क्या हम इसके इस्तेमाल में पर्याप्त सावधानी बरत रहे हैं? हाल ही में सामने आई कुछ घटनाओं ने बिजली के उपयोग से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बेंगलुरु और हैदराबाद की दो दर्दनाक घटनाएं
हाल ही में बेंगलुरु के एक पांच सितारा होटल के स्विमिंग पूल में संदिग्ध रूप से करंट उतरने से दो विदेशी नागरिकों की मौत हो गई और अन्य लोग घायल हो गए। आराम और सुविधा के लिए जानी जाने वाली ऐसी जगहों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी चिंता का विषय है। वहीं, दूसरी घटना हैदराबाद के पास हुई, जहां खेतों में जंगली सूअरों से फसल बचाने के लिए लगाई गई अवैध बिजली की तारबंदी की चपेट में आने से दो युवाओं की जान चली गई।
सुरक्षा ऑडिट और नियमों की जरूरत
इन दोनों घटनाओं की परिस्थितियां भले ही अलग रही हों, लेकिन इनके पीछे मानवीय लापरवाही और बिजली के गलत इस्तेमाल की समानता साफ दिखाई देती है। बड़े होटलों और व्यावसायिक परिसरों में जिस प्रकार फायर सेफ्टी की जांच होती है, उसी तरह नियमित इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट होना भी अनिवार्य होना चाहिए। इसके अलावा, खेतों के आसपास या अन्य जगहों पर बिजली के खुले और खतरनाक तारों का उपयोग किसी भी4 तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता।
जिम्मेदारी और कानूनी ढांचा
प्राकृतिक आवासों के कम होने से जानवर भोजन की तलाश में बस्तियों और खेतों की तरफ रुख कर रहे हैं, लेकिन इसके समाधान के लिए जानलेवा फंदे लगाना किसी भी सभ्य समाज का हिस्सा नहीं हो सकता। यह विडंबना ही है कि जंगली जानवरों को रोकने के लिए बिछाए गए बिजली के तार अंततः इंसानों की जान ले रहे हैं। पानी, सड़कों और अन्य खतरनाक पदार्थों की तरह बिजली के मीटर से बाहर निकलने के बाद के उपयोग के लिए भी स्पष्ट और कड़े कानूनी प्रावधान होने चाहिए। बिजली बोर्ड, स्थानीय निकाय और प्रशासन को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि इस शक्तिशाली ऊर्जा का उपयोग केवल एक उपयोगी सेवा के रूप में हो, न कि अनजाने में किसी की जान लेने के साधन के रूप में।

