Site icon Memoirs Publishing

दीवाली पर चीनी उत्पादों की मांग और व्यापार घाटे पर ग्लोबल टाइम्स की टिप्पणी

दीवाली पर चीनी उत्पादों की मांग और व्यापार घाटे पर ग्लोबल टाइम्स की टिप्पणी

दीपावली के अवसर पर भारतीय बाजारों में चीन में बने सजावटी सामान की मौजूदगी और दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। चीनी मीडिया ने इस विषय पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि केवल देशभक्ति की भावना के बल पर ग्राहकों को आकर्षित नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए सही कीमत, विविधता और समय पर आपूर्ति जरूरी है।

भारत और चीन के बीच बढ़ता व्यापार घाटा

आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत और चीन का कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 151 अरब डॉलर दर्ज किया गया। इस अवधि में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया, जबकि इससे पिछले वर्ष यह आंकड़ा लगभग 99 अरब डॉलर था। इस दौरान चीन को भारत का निर्यात लगभग 19.47 अरब डॉलर रहा और आयात 131 अरब डॉलर से अधिक दर्ज किया गया, जिससे चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है।

वाणिज्य मंत्री का बयान और बाजार की स्थिति

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस मामले पर स्पष्ट किया है कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, लेकिन लोगों पर किसी भी प्रकार की जबरदस्ती नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जो आयातक कानूनी रूप से कर चुकाकर सामान लाते हैं, उन्हें अनुमति मिलनी चाहिए क्योंकि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का पालन करता है। बाजार में सजावटी लाइट्स और एलईडी स्ट्रिंग्स जैसे सामान अपनी कम कीमत और उपलब्धता के कारण खरीदारों के बीच लोकप्रिय बने हुए हैं, क्योंकि समान भारतीय उत्पादों की कीमतें तुलनात्मक रूप से अधिक होती हैं।

विनिर्माण और प्रतिस्पर्धा का दायरा

रिपोर्ट के अनुसार, त्योहारी सामान द्विपक्षीय व्यापार का एक छोटा हिस्सा है, लेकिन यह घरेलू विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है। आयातित वस्तुएं वितरकों के लिए लागत कम करने और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प उपलब्ध कराने का काम करती हैं। भारतीय कंपनियों को बाजार में टिकने के लिए केवल राष्ट्रीय भावनाओं के बजाय विविधता, समय पर डिलीवरी और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी गई है।

Exit mobile version