कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पेट्रोल में तय सीमा से अधिक एथनॉल मिलाए जाने के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका दावा है कि इस अत्यधिक मिलावट के कारण राज्यभर में हजारों वाहनों के इंजन बार-बार बंद होने और माइलेज घटने जैसी गंभीर परेशानियां सामने आ रही हैं। सरकार का कहना है कि इस मामले की जांच की जा रही है और इसके आंकड़े जल्द ही सार्वजनिक किए जाएंगे।
पेट्रोल पंपों पर हो रही है मिलावट
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि यह मिलावट तेल आपूर्ति के स्तर पर नहीं, बल्कि सीधे तौर पर पेट्रोल पंपों पर की जा रही है। एथनॉल की कीमत कम होने के कारण अधिक मुनाफा कमाने के इरादे से यह गड़बड़ी की जा रही है। राज्य सरकार ने इस संबंध में कई स्थानों से पेट्रोल के नमूने एकत्र किए हैं और जांच प्रक्रिया का एक बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया गया है। सरकार का यह भी कहना है कि इस पूरी स्थिति से केंद्र सरकार को भी अवगत करा दिया गया है।
निर्धारित सीमा से अधिक एथनॉल मिलने का दावा
इससे पहले राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद ने जानकारी दी थी कि विभिन्न जिलों से लिए गए नमूनों की जांच में एथनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत तक पाई गई है। सरकारी नियमों के मुताबिक अधिकतम सीमा केवल 20 प्रतिशत (E20) ही तय की गई है। इस खुलासे के बाद से राज्य सरकार और तेल विपणन कंपनियों के बीच तनाव बढ़ गया है।
तेल कंपनियों ने खारिज किए आरोप
दूसरी तरफ, देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने एक संयुक्त बयान जारी कर इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। तेल कंपनियों का कहना है कि उनके द्वारा आपूर्ति किया जाने वाला पेट्रोल पूरी तरह से भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के ई-20 मानकों के अनुकूल है। कंपनियों ने राज्य सरकार की सैंपलिंग और थर्ड-पार्टी लैब परीक्षण की पद्धति पर भी सवाल उठाए हैं।

