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एनपीएस और पीपीएफ: रिटायरमेंट योजना के लिए कौन सा विकल्प बेहतर है

एनपीएस और पीपीएफ: रिटायरमेंट योजना के लिए कौन सा विकल्प बेहतर है

रिटायरमेंट की योजना बनाते समय सही निवेश विकल्प चुनना बहुत महत्वपूर्ण होता है। भारत में नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) दोनों ही लंबे समय के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने वाली लोकप्रिय सरकारी योजनाएं हैं। इन दोनों योजनाओं की अपनी विशेषताएं, कर लाभ और रिटर्न के अलग-अलग नियम हैं, जिन्हें समझकर निवेशक अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं।

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) की मुख्य विशेषताएं

नेशनल पेंशन सिस्टम एक सरकार समर्थित और बाजार से जुड़ी हुई पेंशन योजना है, जिसे मुख्य रूप से दीर्घकालिक रिटायरमेंट सुरक्षा के लिए तैयार किया गया है। इस योजना में चक्रवृद्धि प्रभाव के माध्यम से निवेशकों को अच्छे रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। इसमें संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के कामगार शामिल हो सकते हैं। 18 से 70 वर्ष की आयु के भारतीय नागरिक इस योजना के तहत खाता खोल सकते हैं।

एनपीएस में निवेश करने पर आयकर अधिनियम के तहत कर छूट का लाभ भी मिलता है। योजना के नियमों के अनुसार, 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर निवेशक अपने संचित फंड का 60 प्रतिशत हिस्सा एकमुश्त निकाल सकते हैं, जबकि शेष राशि से एन्युटी खरीदनी होती है। फंड से समय से पहले निकासी के कुछ विशेष नियम और शर्तें हैं।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) की खास बातें

पब्लिक प्रोविडेंट फंड देश में एक बेहद लोकप्रिय बचत योजना है, जो निवेशकों को पूरी तरह से सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न प्रदान करती है। यह एक दीर्घकालिक निवेश विकल्प है जिसका लॉक-इन पीरियड 15 वर्षों का होता है। सरकार इस योजना पर सालाना आधार पर ब्याज तय करती है, जो जोखिम-मुक्त निवेश चाहने वाले लोगों के लिए एक आदर्श विकल्प माना जाता है।

पीपीएफ खाते में एक वित्तीय वर्ष के दौरान न्यूनतम 500 रुपये से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक जमा किए जा सकते हैं। इस योजना के तहत मिलने वाला ब्याज और निवेश की गई राशि दोनों ही कर-मुक्त होते हैं। पीपीएफ खाता केवल भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध है और इसमें संयुक्त खाते की अनुमति नहीं होती है। हालांकि, आवश्यकता पड़ने पर खाताधारकों को लोन और आंशिक निकासी की सुविधा भी मिलती है।

दोनों योजनाओं में मुख्य अंतर

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