सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं का आखिरकार निपटारा कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से अदालत को यह आधिकारिक जानकारी दी गई थी कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत का निर्णय
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंदिर के चंदे में कथित हेराफेरी और चोरी के मामलों की सुनवाई करते हुए सभी लंबित याचिकाओं को समाप्त कर दिया। इसके साथ ही, स्थानीय न्यायिक मजिस्ट्रेट को कानून के निर्धारित नियमों के अनुसार आगे की कार्यवाही को सुचारू रूप से जारी रखने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी पूरी तरह से स्पष्ट किया कि इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपों की सच्चाई, सत्यता या उनके गुण-दोष पर अदालत की तरफ से कोई भी व्यक्तिगत या आधिकारिक राय व्यक्त नहीं की गई है।
दान राशि की गिनती में कथित गड़बड़ी का मामला
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को विस्तार से बताया कि राम मंदिर में मिलने वाली दान राशि की गिनती के वक्त कथित तौर पर चोरी की गई थी। दान की रकम को गिनने के काम में लगे हुए कुछ अधिकारियों पर यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने वह पैसे ले लिए और या तो उन्हें किसी अन्य जगह पर निवेश कर दिया या फिर अपने निजी बैंक खातों में जमा कर लिए।
याचिकाकर्ताओं को मिली स्थानीय मजिस्ट्रेट की सहायता करने की अनुमति
इस पूरे मामले में जनहित के पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने याचिकाकर्ताओं को स्थानीय मजिस्ट्रेट के सामने चल रही कार्यवाही में सहायता करने की अनुमति प्रदान कर दी है। यह अनुमति ठीक उसी तर्ज पर दी गई है जैसे सामान्यतः आपराधिक मामलों में पीड़ितों को न्यायिक कार्यवाही में मदद करने की अनुमति दी जाती है। अदालत ने एक बार फिर यह बात दोहराई कि याचिकाकर्ताओं को सुनवाई या कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति देने के इस फैसले को किसी भी स्थिति में मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं माना जाना चाहिए। अब इस मामले की पूरी कानूनी कार्यवाही स्थानीय अदालत और मजिस्ट्रेट के सामने आगे की जांच के अनुसार जारी रहेगी।

