भाषा सीखने की प्रक्रिया में व्याकरण रटाने से ज्यादा जरूरी उसे बोलचाल में उपयोग करना है। कई छात्र वर्षों तक व्याकरण के नियम और परिभाषाएं याद रखते हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में कुछ वाक्य भी ठीक से नहीं बोल पाते।
व्याकरण से ज्यादा बोलचाल पर क्यों दें जोर?
स्कूलों में अक्सर बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाई तो जाती है, लेकिन उन्हें संवाद करने का माहौल नहीं मिलता। आठवीं कक्षा का एक छात्र जिसे सातों साल से अंग्रेजी के नियम याद हैं, वह भी अपना परिचय देने में असहज महसूस कर सकता है। समस्या यह है कि हमने बच्चों को भाषा बोलना नहीं, केवल पढ़ना सिखाया है।
एक साल का व्यावहारिक एक्शन प्लान
बच्चों में भाषा का कौशल और आत्मविश्वास विकसित करने के लिए महंगी कक्षाओं या आधुनिक तकनीक की आवश्यकता नहीं होती। इसे दैनिक अभ्यास के जरिए बेहतर बनाया जा सकता है:
- पहला महीना: बच्चों को अभिवादन करना, खुद का परिचय देना और परिवार के बारे में बात करना सिखाएं।
- अगले दो महीने: रोजमर्रा की बातचीत जैसे सब्जी खरीदना या रास्ता पूछना सिखाएं।
- बाद के महीने: कहानी सुनाना, घटनाओं का वर्णन करना और अपनी राय व्यक्त करना सिखाएं।
सकारात्मक और सुरक्षित माहौल
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि अंग्रेजी बुद्धिमत्ता का पैमाना नहीं होती। क्षेत्रीय बोलियां बोलने वाला बच्चा किसी भी तरह से कम बुद्धिमान नहीं है। हालांकि, अंग्रेजी उच्च शिक्षा और रोजगार के नए अवसर जरूर खोलती है। इसके लिए स्कूलों को ऐसा वातावरण बनाना चाहिए जहां गलतियों पर हंसा न जाए, बल्कि बच्चों को बात करने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जाए।

