हरिद्वार ज़मीन घोटाले में धामी सरकार की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई: दो IAS, एक PCS समेत 12 अफसर निलंबित

रिपोर्ट: The Mountain Stories | 3 जून 2025

हरिद्वार ज़िले में हुए बहुचर्चित ज़मीन घोटाले में उत्तराखंड की धामी सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। 15 करोड़ की भूमि को 54 करोड़ में खरीदने के इस मामले में 2 IAS, 1 PCS सहित कुल 12 अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें से 10 को निलंबित कर दिया गया है जबकि 2 की सेवाएं समाप्त की गई हैं।

क्या है मामला?

हरिद्वार के ग्राम सराय में हरिद्वार नगर निगम ने वर्ष 2024 में चुनाव आचार संहिता के दौरान 2.3 हेक्टेयर भूमि खरीदी थी। यह भूमि अनुपयुक्त बताई जा रही है, जहाँ पहले से ही कूड़ा डंप किया जा रहा था। आरोप है कि कृषि भूमि को 143 के तहत दर्ज करवाकर उसकी बाज़ारी कीमत को कई गुना बढ़ाकर लगभग 54 करोड़ रुपये में खरीदा गया, जबकि इसकी वास्तविक कीमत करीब 15 करोड़ रुपये आँकी गई थी।

सत्ता में रहते हुए सख्त कार्रवाई

यह पहली बार हुआ है कि सत्ता में बैठी भाजपा सरकार ने अपने ही अधिकारियों के खिलाफ इतना बड़ा एक्शन लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर इस घोटाले की जांच IAS रणवीर सिंह चौहान को सौंपी गई थी। प्रारंभिक रिपोर्ट में प्रशासनिक लापरवाही, नियमों की अनदेखी और वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई।

निलंबित अधिकारी (3 जून की कार्रवाई)

  1. कर्मेन्द्र सिंह – जिलाधिकारी एवं नगर निगम प्रशासक, हरिद्वार

  2. वरुण चौधरी – तत्कालीन नगर आयुक्त

  3. अजयवीर सिंह – तत्कालीन SDM, हरिद्वार

  4. निकिता बिष्ट – वरिष्ठ वित्त अधिकारी

  5. राजेश कुमार – कानूनगो, तहसील हरिद्वार

  6. कमलदास – मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, तहसील

  7. विक्की – वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक

पहले चरण की कार्रवाई (1 मई 2025)

  1. रविंद्र कुमार दयाल – प्रभारी सहायक नगर आयुक्त (सेवा समाप्त)

  2. आनंद सिंह मिश्रवाण – अधिशासी अभियंता (निलंबित)

  3. लक्ष्मीकांत भट्ट – कर एवं राजस्व अधीक्षक (निलंबित)

  4. दिनेश चंद्र कांडपाल – अवर अभियंता (निलंबित)

  5. वेदपाल – संपत्ति लिपिक (सेवा विस्तार समाप्त)

संदेहास्पद प्रक्रिया और पारदर्शिता की कमी

जांच में यह सामने आया है कि:

  • ज़मीन खरीद के लिए कोई तात्कालिक आवश्यकता नहीं थी

  • प्रस्तावित भूमि अनुपयुक्त थी

  • खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई

  • नियमों की अनदेखी की गई और फर्जी अनुमतियाँ दर्शाई गईं

सत्ता का नया संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह कदम केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि एक राजनीतिक और नैतिक संदेश भी है कि उत्तराखंड में अब ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को सख्ती से लागू किया जाएगा। राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि चाहे कितनी भी ऊँची कुर्सी पर क्यों न हो, भ्रष्टाचार के मामलों में कोई छूट नहीं मिलेगी।

अब आगे क्या?

मामले की जांच अब विजिलेंस विभाग को सौंप दी गई है। जांच के दायरे में और भी अधिकारी, राजस्व रजिस्टर, भूमि मूल्यांकन प्रक्रिया और ट्रांजैक्शन की बैंकिंग गतिविधियाँ आ सकती हैं।

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